
कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि यानी आज अहोई अष्टमी का पवित्र पर्व मनाया जा रहा है। यह दिन माताओं के लिए बेहद खास होता है, क्योंकि वे अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छी सेहत, सुरक्षा और खुशहाली के लिए पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं। शाम के समय अहोई माता की पूजा की जाती है और आसमान में तारों या चंद्रमा को देखकर अर्घ्य देने के बाद व्रत खोला जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं आज अहोई अष्टमी (Ahoi Ashtami 2026 Puja Vidhi) की सही पूजा विधि, भोग, मंत्र, आरती और व्रत कथा।
पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय एक साहूकार के सात बेटे और एक बेटी थी। दीपावली से पहले सातों भाई और उनकी पत्नी मिलकर घर की लीपापोती के लिए जंगल से मिट्टी खोद रहे थे। साहूकार की बेटी भी साथ गई थी। मिट्टी खोदते समय गलती से लड़की की खुरपी से साही यानी एक जंगली जानवर के बच्चे को चोट लग गई और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। यह देखकर साही बेहद क्रोधित हो गई और उसने शाप दिया कि जैसे तूने मेरी गोद सूनी की है, वैसे ही मैं भी तेरी कोख सूनी कर दूंगी। भयभीत साहूकार की बेटी ने अपनी गलती के लिए साही से क्षमा मांगी। साही ने कहा कि अगर तुम अहोई माता की शरण में जाओ और विधि-विधान से व्रत रखकर माता से क्षमा मांगो, तभी तुम्हारा कल्याण हो सकता है। लड़की ने साही के बताए अनुसार कार्तिक महीने की अष्टमी को व्रत रखा और अहोई माता की पूजा की। साथ ही अपनी भूल की क्षमा मांगी। उसकी सच्ची भक्ति से प्रसन्न होकर माता ने उसे क्षमा कर दिया और आशीर्वाद दिया कि तुम्हारी संतान हमेशा सुरक्षित रहेगी। तभी से माताएं अपनी संतानों की रक्षा के लिए यह व्रत रखती चली आ रही हैं।
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