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Aja Ekadashi 2026: अजा एकादशी की कथा को पढ़े बिना अधूरा माना जाता है व्रत, जरूर करें इसका पाठ

Vaishnavi DwivediVaishnavi DwivediUpdated 06 Sep 2026 01:00 PM IST
Aja Ekadashi 2026: अजा एकादशी की कथा को पढ़े बिना अधूरा माना जाता है व्रत, जरूर करें इसका पाठ

Special Things

अजा एकादशी का व्रत इसकी पावन कथा को सुने या पढ़े बिना अधूरा माना जाता है, तो आइए यहां राजा हरिश्चंद्र की पौराणिक कथा का पाठ करते हैं।

भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को अजा एकादशी कहा जाता है। सनातन धर्म में इस व्रत का बहुत ज्यादा महत्व है, क्योंकि यह व्रत व्यक्ति के पूर्व जन्मों के पापों का नाश करता है और जीवन में सुख-समृद्धि लाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अजा एकादशी की पूजा तब तक पूर्ण नहीं मानी जाती, जब तक कि साधक इस दिन अजा एकादशी की पौराणिक व्रत कथा को सुनता या पढ़ता नहीं है। पौराणिक काल में राजा हरिश्चंद्र ने भी इसी पावन व्रत और कथा के प्रभाव से अपना खोया हुआ राजपाठ पाया था, तो आइए इस पावन कथा का पाठ करते हैं।

अजा एकादशी व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, राजा हरिश्चंद्र अपनी सत्यनिष्ठा और धर्म के लिए जाने जाते थे। एक बार अपने सत्य वचन की परीक्षा में उन्होंने अपना संपूर्ण राज्य, धन-दौलत और महल महर्षि विश्वामित्र को दान में दे दिया। इतना ही नहीं, दान की दक्षिणा चुकाने के लिए उन्होंने खुद को एक चंडाल के हाथ बेच दिया और अपनी पत्नी शैव्या तथा पुत्र रोहिताश्व को भी बेच दिया। राजा हरिश्चंद्र चंडाल के सेवक बनकर श्मशान घाट पर मृतकों के वस्त्र एकत्र करने और अंतिम संस्कार का कर वसूलने का काम करने लगे। मुश्किलों से भरा जीवन बिताते हुए भी राजा हरिश्चंद्र ने कभी सत्य और धर्म का मार्ग नहीं छोड़ा।

महर्षि गौतम से मुलाकात और उपाय

एक दिन राजा हरिश्चंद्र अपने जीवन और परिस्थितियों के बारे में सोचकर बहुत दुखी हो रहे थे। उसी समय वहां परम ज्ञानी महर्षि गौतम पधारे। राजा हरिश्चंद्र ने हाथ जोड़कर महर्षि को प्रणाम किया और अपने सभी दुखों के अंत का उपाय पूछा। महर्षि गौतम ने दयाभाव से कहा कि हे राजन भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष में अजा नाम की बेहद कल्याणकारी एकादशी आती है। तुम भक्तिभाव और सात्विकता के साथ इस एकादशी का व्रत करो और भगवान विष्णु का पूजन करो। इस व्रत के प्रभाव से तुम्हारे समस्त पाप नष्ट हो जाएंगे और तुम्हें दुखों से मुक्ति मिलेगी।

व्रत का प्रभाव और चमत्कार

महर्षि गौतम के बताए अनुसार, राजा हरिश्चंद्र ने अजा एकादशी पर पूर्ण विधि-विधान से व्रत रखा, रात्रि जागरण किया और भगवान श्रीहरि विष्णु की आराधना की। व्रत के पूर्ण होते ही भगवान विष्णु की कृपा से चमत्कार हुआ। राजा हरिश्चंद्र के सभी पाप नष्ट हो गए। उनके मृत पुत्र रोहिताश्व को दोबारा जीवनदान मिला, उनकी पत्नी शैव्या को फिर से राजसी सम्मान मिला और राजा हरिश्चंद्र को उनका संपूर्ण खोया हुआ राज्य वापस मिल गया। अंत समय में राजा हरिश्चंद्र अपने परिवार सहित बैकुंठ धाम को प्राप्त हुए।

अजा एकादशी की कथा का महत्व

अजा एकादशी की कथा हमें यह सिखाती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, मनुष्य को कभी भी धर्म, सत्य और धैर्य का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए, जो व्यक्ति अजा एकादशी के दिन भगवान विष्णु का ध्यान करके इस कथा का पाठ करता है या सुनता है उसके जाने-अनजाने में किए गए सभी पाप और पूर्व जन्म के कर्म दोष नष्ट हो जाते हैं। इसके साथ ही जीवन में आ रही आर्थिक, मानसिक और पारिवारिक बाधाएं दूर होती हैं।

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