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Bhadrapada Amavasya 2026: इस बार 2 दिन रहेगी भाद्रपद अमावस्या? नोट करें तर्पण नियम

Vaishnavi DwivediVaishnavi DwivediUpdated 07 Sep 2026 04:36 PM IST
Bhadrapada Amavasya 2026: इस बार 2 दिन रहेगी भाद्रपद अमावस्या? नोट करें तर्पण नियम

Special Things

भाद्रपद अमावस्या (Bhadrapada Amavasya 2026 Date And Rules) इस बार 2 दिन मनाई जा रही है। आइए इससे जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं।

सनातन धर्म में भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है। इसे भाद्रपद अमावस्या, कुशोत्पाटिनी अमावस्या और पिठोरी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन धार्मिक अनुष्ठानों के लिए साल भर इस्तेमाल की जाने वाली कुश तोड़ी जाती है।  इसके साथ ही यह तिथि पितरों की तृप्ति, तर्पण और पिंड दान के लिए बेहद कल्याणकारी मानी गई है। वैदिक पंचांग को देखते हुए इस साल भाद्रपद अमावस्या दो दिन मनाई जाएगी। 
शास्त्रों में स्नान-दान, पिठोरी व्रत और पितृ तर्पण के लिए अलग-अलग दिनों का महत्व बताया गया है। आइए समझते हैं कि किस दिन कौन सा काम करना सही रहेगा?

इस बार 2 दिन मनाई जाएगी अमावस्या

पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि 10 सितंबर को सुबह 10 बजकर 33 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, इसका समापन 11 सितंबर को सुबह 08 बजकर 56 मिनट पर होगा। इस बार 10 और 11 सितंबर दोनों ही दिन अमावस्या का प्रभाव रहेगा।  इसलिए अलग-अलग धार्मिक कामों के लिए दोनों ही दिनों का अपना महत्व है।

पिठोरी अमावस्या पूजन

भाद्रपद अमावस्या को पिठोरी अमावस्या भी कहते हैं। शास्त्रों के अनुसार, पिठोरी व्रत और पूजन के लिए प्रदोषव्यापिनी अमावस्या का महत्व माना गया है। 10 सितंबर की शाम को अमावस्या तिथि रहेगी, इसीलिए पिठोरी देवी, सप्तमातृका और 64 योगिनियों की पूजा 10 सितंबर की शाम को ही की जाएगी।

स्नान-दान और पितृ तर्पण

पितृ काम, स्नान-दान और श्राद्ध कर्म के लिए सूर्योदय के समय अमावस्या का होना जरूरी होता है। 11 सितंबर को सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि रहेगी। इसलिए भाद्रपद अमावस्या का पवित्र नदियों में स्नान, दान और पितृ तर्पण करना 11 सितंबर को ही अच्छा माना जाएगा। 

पितृ तर्पण के जरूरी नियम 

  • तर्पण हमेशा दोपहर के समय यानी कुतुप काल में करें। सूर्यास्त के बाद तर्पण वर्जित है।
  • तर्पण करते समय आपका मुख दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए। तर्पण के लिए तांबे, पीतल या कांसा के बर्तन का ही प्रयोग करें। स्टील या प्लास्टिक के बर्तनों का प्रयोग न करें।
  • अनामिका उंगली में कुश की पवित्री पहनें। हाथ की अंजलि में जल, कच्चा दूध और काले तिल लेकर जल अर्पित करें।
  • तर्पण और पूजन के बाद भोजन में से 5 हिस्से गाय, कुत्ते, कौए, चींटी और किसी ब्राह्मण के लिए जरूर निकालें। 

ध्यान रखें ये बातें 

  • 10 और 11 सितंबर दोनों ही दिन घर में शुद्ध सात्विक माहौल रखें। लहसुन, प्याज या तामसिक चीजों का प्रयोग न करें।
  • अमावस्या तिथि के दिन घर के मुख्य सदस्यों को बाल, दाढ़ी या नाखून काटने से बचना चाहिए।
  • 11 सितंबर को तर्पण के बाद किसी गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति को अनाज, तिल, गुड़ या सफेद वस्त्र का दान करने से पितृ दोष शांत होता है और घर में सुख-समृद्धि आती है।

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