
हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को बेहद शुभ माना गया है। हर माह की शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा पाने के लिए प्रदोष व्रत रखा जाता है, जब त्रयोदशी तिथि मंगलवार के दिन पड़ती है, तो इसे भौम प्रदोष व्रत कहते हैं। भौम प्रदोष का संयोग भोलेनाथ और मंगल देव दोनों की कृपा दिलाता है। इस दिन व्रत रखने से कर्ज मुक्ति, जमीन से जुड़े लाभ और जल्द विवाह के योग बनते हैं। हालांकि व्रत का पूरा फल तभी मिलता है जब पूजा पूरी भक्ति और सही नियमों से की जाए। आइए जानते हैं भौम प्रदोष व्रत (Bhaum Pradosh Vrat 2026) के दिन किन गलतियों से बचना चाहिए और पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?
प्रदोष व्रत की पूजा हमेशा सूर्यास्त के बाद यानी प्रदोष काल में की जाती है। ऐसे में पंचाग को देखते हुए 8 सितंबर को प्रदोष काल पूजा मुहूर्त शाम 6:35 बजे से रात 8:52 बजे तक रहेगा।
भौम प्रदोष के दिन पूजा के दौरान काले या गहरे रंग के कपड़े न पहनें। इस दिन लाल, नारंगी या पीले रंग के कपड़े पहनना बेहद शुभ माना जाता है।
भगवान शिव की पूजा में गलती से भी तुलसी के पत्ते, केतकी के फूल, हल्दी, सिंदूर या नारियल का पानी न चढ़ाएं। शिवलिंग पर हमेशा जल, बिल्व पत्र, भांग, धतूरा और लाल चंदन ही अर्पित करें।
महादेव को बिल्व पत्र बेहद प्रिय है, लेकिन ध्यान रखें कि बिल्व पत्र कहीं से भी कटा फटा, सूखा या कीड़ा लगा हुआ न हो। बिल्व पत्र हमेशा तीन पत्तियों वाला और अखंडित ही होना चाहिए।
प्रदोष व्रत रखने वाले साधक को शाम के समय (प्रदोष काल) में सोना नहीं चाहिए। इस समय भगवान शिव और माता पार्वती धरती लोक पर आते हैं, इसलिए शाम को केवल भजन, पूजा-पाठ और ध्यान करना चाहिए।
व्रत के दिन घर में लहसुन, प्याज या तामसिक भोजन न बनाएं। साथ ही किसी के प्रति मन में क्रोध, निंदा, चुगली या कटु वचन न बोलें।
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