
भौम प्रदोष का दिन बेहद शुभ और मंगलकारी माना जाता है। यह दिन भगवान शिव को समर्पित है। कहते हैं कि इस दिन पूजा-पाठ और व्रत रखने से जीवन में शुभता का आगमन होता है। इसके साथ ही जीवन में खुशहाली आती है। इस बार यह पावन व्रत 07 सितंबर यानी आज के दिन रखा जा रहा है। आइए इस पावन व्रत (Bhaum Pradosh Vrat 2026) से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं।
इस दिन प्रदोष काल में ही पूजा का विधान है। इसलिए सूर्यास्त से थोड़ा पहले स्नान करें और लाल या पीले रंग के वस्त्र धारण करें।
घर के मंदिर में या पास के शिव मंदिर जाकर शिवलिंग पर तांबे के पात्र से जल और गंगाजल अर्पित करें। इसके बाद कच्चे दूध में थोड़ा सा केसर मिलाकर अभिषेक करें।
शिव जी को लाल चंदन का लेप लगाएं।
बिल्व पत्र, धतूरा, भांग, लाल कनेर या गुड़हल के फूल और शमी पत्र अर्पित करें।
भगवान शिव के सामने देशी घी का दीपक जलाएं। उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें और शिव-पार्वती का ध्यान करें।
भौम प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें या सुनें और अंत में कपूर जलाकर आरती करें।
केसरिया खीर या हलवा: भौम प्रदोष के दिन भगवान शिव को सूजी, मखाने का हलवा या फिर केसर दूध का भोग लगाना बेहद शुभ माना जाता है।
शहद और गुड़: मंगल ग्रह के प्रभाव को शुभ करने के लिए इस दिन शिवलिंग पर शहद अर्पित करना और गुड़ का भोग लगाकर प्रसाद के रूप में बांटना चाहिए।
मौसमी फल: अनार या लाल रंग के फलों का भोग लगाएं।
1. ॐ नमः शिवाय
2. ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः
3. ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥"
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