Pitru Paksha Tarpan Rules: पितृ पक्ष में पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण कैसे करना चाहिए? आइए यहां जानते हैं।
सनातन धर्म में पितृ पक्ष का समय पूर्वजों के प्रति अपनी श्रद्धा जाहिर करने का सबसे पावन अवसर होता है। भाद्रपद महीने की पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन माह की अमावस्या तक चलने वाले इन 16 दिनों में पितृ पृथ्वी लोक पर आते हैं। इस दौरान पितरों की आत्मा की शांति के लिए उनका तर्पण किया जाता है। हालांकि शास्त्रों में तर्पण करने के कुछ विशेष नियम बताए गए हैं, तो आइए जानते हैं पितृ पक्ष में तर्पण के नियम क्या हैं?
पितृ पक्ष में तर्पण के नियम
तर्पण की सही दिशा
तर्पण करते समय आपका मुख हमेशा दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार, दक्षिण दिशा पितरों और यमराज की दिशा मानी गई है। देव तर्पण करते समय पूर्व दिशा और ऋषि तर्पण के समय उत्तर दिशा की ओर मुख किया जाता है।
तर्पण का सही समय
तर्पण हमेशा दोपहर के समय यानी कुतुप काल में ही करना चाहिए। सुबह केवल देवताओं का पूजन होता है, इसलिए सुबह जल्दी या सूर्यास्त के बाद तर्पण करना पूरी तरह वर्जित माना गया है।
काले तिल और कुश
काले तिल: पितृ तर्पण में केवल काले तिल का ही प्रयोग करें। गलती से भी सफेद तिल का उपयोग पितृ कार्य में न करें।
कुश: अनामिका अंगुली में कुशा की अंगूठी पहनकर ही तर्पण करें। ऐसा माना जाता है कि बिना कुश के किया गया तर्पण पूर्ण नहीं माना जाता है।
सही पात्र
तर्पण का जल देने के लिए तांबे, पीतल, चांदी या कांसा के बर्तन का ही प्रयोग करें। तर्पण के लिए कभी भी प्लास्टिक, कांच, लोहा या स्टील के बर्तनों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
पितृ तीर्थ से जल देना
तर्पण करते समय हाथ की अंजलि में जल, कच्चा दूध, गंगाजल और काले तिल लें। इसके बाद अंगूठे और तर्जनी उंगली के बीच वाले स्थान से जल को धीरे-धीरे किसी पात्र या कुशा पर गिराएं।
तर्पण करते समय क्या न करें?
काले कपड़े न पहनें: तर्पण या श्राद्ध कर्म करते समय पुरुष सफेद धोती या बिना सिला हुआ वस्त्र ही पहनें। काले या गहरे रंग के कपड़े पहनकर तर्पण न करें।
तामसिक भोजन से दूरी: पितृ पक्ष के दौरान घर में तामसिक भोजन का प्रयोग बिल्कुल बंद कर दें।
शारीरिक संयम: तर्पण करने वाले व्यक्ति को इस दौरान दाढ़ी, बाल या नाखून नहीं कटवाने चाहिए और पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
गुस्से से बचें: तर्पण के दिन मन शांत रखें। घर के किसी बुजुर्ग, असहाय व्यक्ति या घर पर आए किसी जीव का अपमान न करें।
तर्पण के बाद पंचबलि का महत्व
तर्पण तब तक अधूरा रहता है, जब तक आप पंचबलि (गाय, कुत्ते, कौए, चींटियों, ब्राह्मण) न निकालें। ऐसा करने से पितृ प्रसन्न होकर कुल की वृद्धि, आरोग्य और समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।