Logo

Sawan Shivratri 2026: 11 अगस्त को सावन शिवरात्रि, जानें पूजा मुहूर्त, निशिता काल, विधि, मंत्र और धार्मिक महत्व

Devanand sharmaDevanand sharmaUpdated 10 Aug 2026 06:19 PM IST
Sawan Shivratri 2026: 11 अगस्त को सावन शिवरात्रि, जानें पूजा मुहूर्त, निशिता काल, विधि, मंत्र और धार्मिक महत्व

Special Things

Sawan Shivratri 2026: इस बार 11 अगस्त, मंगलवार को मनाई जाएगी। श्रावण कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी पर पड़ने वाली इस पावन रात्रि में भगवान शिव की पूजा, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, व्रत और मंत्र जाप का विशेष महत्व माना जाता है। 

Sawan Shivratri 2026: सावन में सोमवार तो हर साल आते हैं, लेकिन जब इसी पवित्र महीने में शिवरात्रि की रात आती है तो शिव भक्तों की आस्था कुछ और ही रंग ले लेती है। मंदिरों में घंटियां बजती हैं, शिवलिंग पर जल चढ़ाने वालों की कतार लगती है और चारों तरफ हर हर महादेव की आवाज सुनाई देती है। साल 2026 में सावन शिवरात्रि 11 अगस्त, मंगलवार को पड़ रही है। अगर आप इस दिन व्रत रखने वाले हैं या रात में महादेव की पूजा करना चाहते हैं, तो पहले से पूजा का समय और तरीका जान लेना अच्छा रहेगा। खासकर शिवरात्रि में रात्रि पूजा का महत्व होने के कारण दिन की पूजा और रात की पूजा में अंतर समझना जरूरी है। आइए जानते हैं सावन शिवरात्रि 2026 से जुड़ी जरूरी बातें। 

सावन शिवरात्रि 2026 कब है?

सावन शिवरात्रि 11 अगस्त 2026, मंगलवार को मनाई जाएगी। यह पर्व श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर पड़ रहा है।
पंचांग गणना के अनुसार चतुर्दशी तिथि 11 अगस्त को सुबह लगभग 4:54 बजे शुरू होकर 12 अगस्त की रात करीब 1:52 बजे तक रहेगी। इसी कारण 11 अगस्त की रात शिव आराधना के लिए विशेष मानी जाएगी। श्रावण मास में आने वाली इस शिवरात्रि का धार्मिक महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि पूरा सावन ही भगवान शिव की उपासना, जलाभिषेक और शिव नाम के स्मरण के लिए समर्पित माना जाता है।

Sawan Shivratri 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त

सावन शिवरात्रि की पूजा के लिए निशिता काल को विशेष महत्व दिया जाता है। पंचांग के अनुसार 11 अगस्त की रात निशिता काल लगभग रात 12:05 बजे से 12:48 बजे तक रहेगा। इस अवधि में भगवान शिव की विशेष पूजा, अभिषेक और मंत्र जाप किया जा सकता है। भक्त अपनी परंपरा के अनुसार इसी समय शिवलिंग का पूजन कर सकते हैं।

निशिता काल क्या होता है?

निशिता काल रात्रि का वह विशेष मध्य समय है, जिसे धार्मिक परंपरा में शिवरात्रि की साधना और शिव पूजा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।
‘निशिता’ का अर्थ रात्रि का मध्य या मध्यरात्रि से जुड़ा समय है। शिवरात्रि में इस काल का महत्व इसलिए माना गया है क्योंकि यह रात का अत्यंत शांत और एकाग्र समय होता है। बाहरी गतिविधियां कम होने के कारण साधक का मन जप, ध्यान और आराधना में अधिक आसानी से लगाया जा सकता है।
धार्मिक दृष्टि से निशिता काल केवल घड़ी का एक समय नहीं है। यह बाहरी अंधकार के बीच भीतर की चेतना को जागृत करने का प्रतीक भी माना जा सकता है। इसी भाव के कारण शिवरात्रि की रात्रि साधना को विशेष स्थान मिला है।

सावन शिवरात्रि का धार्मिक महत्व

श्रावण मास को भगवान शिव की भक्ति का पवित्र काल माना जाता है। इस महीने में शिवलिंग पर जल चढ़ाने, बेलपत्र अर्पित करने और शिव मंत्र का जाप करने की परंपरा है। इसी मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को आने वाली शिवरात्रि इस आराधना को विशेष साधना का रूप देती है।
भगवान शिव का स्वरूप अपने आप में एक गहरा आध्यात्मिक दर्शन है। वे योगी भी हैं और गृहस्थ भी, संहार के देवता भी कहे जाते हैं और कल्याणकारी भी। उनके मस्तक पर चंद्रमा है, जटाओं में गंगा विराजती हैं, कंठ में विष है और शरीर पर भस्म है।
शिव का यह स्वरूप बताता है कि जीवन में विपरीत परिस्थितियों के बीच भी संतुलन और शांति बनाए रखना ही शिवतत्व का एक महत्वपूर्ण भाव है।
इसीलिए सावन शिवरात्रि को केवल मनोकामना पूर्ति का पर्व मानने के बजाय आत्मचिंतन और शिव के गुणों को जीवन में उतारने का अवसर भी माना जाता है।

सावन शिवरात्रि से जुड़ा पौराणिक महत्व

शिवरात्रि के संबंध में सनातन परंपरा में अनेक धार्मिक कथाएं प्रचलित हैं। इनमें भगवान शिव के अनंत और ज्योतिर्मय स्वरूप से जुड़ी कथा विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
मान्यता के अनुसार एक बार ब्रह्मा और विष्णु के बीच श्रेष्ठता को लेकर विवाद हुआ। तभी उनके सामने एक अनंत ज्योति-स्तंभ प्रकट हुआ। दोनों देवताओं ने उस ज्योति का आदि और अंत खोजने का प्रयास किया, लेकिन उसकी सीमा नहीं मिल सकी। इसी अनंत ज्योति को भगवान शिव के निराकार स्वरूप से जोड़ा जाता है।
इस कथा का धार्मिक संदेश यह है कि शिव का स्वरूप सीमाओं से परे है। वह केवल किसी एक आकार तक सीमित नहीं, बल्कि अनंत चेतना और परम तत्व का प्रतीक है।
इसी भाव के कारण शिवलिंग की पूजा को निराकार शिव की उपासना का माध्यम माना जाता है।

समुद्र मंथन और नीलकंठ शिव का महत्व

भगवान शिव के नीलकंठ स्वरूप से जुड़ी समुद्र मंथन की कथा भी शिव महिमा को समझने में महत्वपूर्ण है। समुद्र मंथन से जब हलाहल विष निकला तो उसके प्रभाव से समस्त सृष्टि संकट में पड़ गई। देवताओं और अन्य शक्तियों ने भगवान शिव की शरण ली। लोककल्याण के लिए शिव ने उस विष को अपने कंठ में धारण कर लिया। विष के प्रभाव से उनका कंठ नीला हो गया और वे नीलकंठ कहलाए। इस कथा का धार्मिक भाव त्याग, करुणा और लोककल्याण से जुड़ा है। शिवरात्रि की पूजा में नीलकंठ शिव का स्मरण भक्त को यह भाव देता है कि सामर्थ्य का श्रेष्ठ उपयोग केवल अपने लिए नहीं, बल्कि कल्याण के लिए होना चाहिए।

शिवरात्रि में रात की पूजा का महत्व

शिवरात्रि में रात्रि को विशेष महत्व दिया गया है। रात का शांत वातावरण साधना और मंत्र जाप के लिए अनुकूल माना जाता है।
इसी कारण शिवरात्रि पर जागरण, जप, ध्यान और चार प्रहर की पूजा की परंपरा है। यहां जागरण का अर्थ केवल नींद से दूर रहना नहीं है। इसका आध्यात्मिक भाव चेतना को जागृत रखना है। मनुष्य सामान्य जीवन में अनेक इच्छाओं, चिंताओं और सांसारिक विचारों में उलझा रहता है। शिवरात्रि की रात कुछ समय के लिए इन सबको पीछे रखकर शिव नाम में मन लगाना साधना का रूप ले लेता है।

सावन शिवरात्रि पर जलाभिषेक का महत्व

भगवान शिव को जल अर्पित करना शिव पूजा की सबसे सरल और प्रचलित विधियों में से एक है। सावन में जलाभिषेक का महत्व और बढ़ जाता है।
जल जीवन और शीतलता का प्रतीक है। शिवलिंग पर जल अर्पित करते समय भक्त महादेव से मन की अशांति दूर होने और जीवन में शांति एवं पवित्रता की कामना करता है।
सावन शिवरात्रि पर जलाभिषेक करते हुए ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करना पूजा को मंत्र और भाव दोनों से जोड़ देता है।
बेलपत्र अर्पित करने का महत्व
भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र का विशेष स्थान है। बेलपत्र की तीन पत्तियों को विभिन्न धार्मिक परंपराओं में त्रिदेव, त्रिगुण और शिव के विभिन्न तत्वों से जोड़ा गया है।
बेलपत्र अर्पित करने का मूल भाव भगवान शिव के प्रति समर्पण है। भक्त जब शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाता है तो उसके साथ अपनी श्रद्धा और मन की प्रार्थना भी अर्पित करता है।
इसलिए बेलपत्र की संख्या से अधिक महत्वपूर्ण उसका श्रद्धापूर्वक अर्पण और शिव नाम का स्मरण है।

सावन शिवरात्रि की पूजा विधि

सावन शिवरात्रि के दिन प्रातः स्नान करके भगवान शिव का ध्यान करें और पूजा का संकल्प लें। पूजा स्थान को स्वच्छ करके शिवलिंग या भगवान शिव के स्वरूप के सामने दीप प्रज्वलित करें।
सबसे पहले शिवलिंग पर स्वच्छ जल चढ़ाएं। इसके बाद गंगाजल और अपनी परंपरा के अनुसार दूध आदि से अभिषेक किया जा सकता है। अभिषेक के बाद पुनः जल अर्पित करें।
अब शिवलिंग पर बेलपत्र, पुष्प और धतूरा अर्पित करें। धूप और दीप जलाएं। भगवान शिव को नैवेद्य अर्पित करें और मंत्र जाप करें।
रात्रि में निशिता काल के दौरान विशेष पूजा करें। जो भक्त चार प्रहर की पूजा करते हैं, वे प्रत्येक प्रहर में शिवलिंग का अभिषेक और पूजन कर सकते हैं।
अंत में भगवान शिव की आरती करें और परिवार, समाज तथा समस्त प्राणियों के कल्याण की प्रार्थना करें।

रुद्राभिषेक का धार्मिक महत्व

सावन शिवरात्रि पर रुद्राभिषेक को विशेष शिव साधना माना जाता है। इसमें भगवान शिव के रुद्र स्वरूप का मंत्रोच्चार और अभिषेक के माध्यम से पूजन किया जाता है।
रुद्राभिषेक के दौरान वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया जाता है और जल सहित विभिन्न अभिषेक द्रव्यों से शिवलिंग का पूजन किया जाता है।
धार्मिक मान्यता में रुद्राभिषेक भगवान शिव की कृपा, शांति, मंगल और आध्यात्मिक उन्नति की कामना से किया जाता है। यह शिव के रुद्र स्वरूप के प्रति श्रद्धा और पूर्ण समर्पण की साधना है।

सावन शिवरात्रि के 3 महत्वपूर्ण मंत्र

1. पंचाक्षरी मंत्र 
ॐ नमः शिवाय।

2. महामृत्युंजय मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥


3. रुद्र गायत्री मंत्र
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि।
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥

मंत्र जाप का महत्व

भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में मंत्र को साधना का शक्तिशाली माध्यम माना गया है। मंत्र का लगातार जाप मन को एक ही भाव में स्थिर करने का अभ्यास कराता है।
‘ॐ नमः शिवाय’ में समर्पण का भाव है, महामृत्युंजय मंत्र में शिव के त्र्यम्बक स्वरूप का स्मरण है और रुद्र गायत्री में सद्बुद्धि तथा आध्यात्मिक प्रेरणा की प्रार्थना है।
इसलिए मंत्र जाप में केवल गिनती पूरी करने के बजाय उसके अर्थ और भाव को समझकर जप करना अधिक सार्थक माना जाता है।

चार प्रहर की शिव पूजा

शिवरात्रि में चार प्रहर की पूजा की परंपरा विशेष मानी जाती है। पूरी रात को चार भागों में विभाजित करके प्रत्येक प्रहर में भगवान शिव का अभिषेक, पूजन और मंत्र जाप किया जाता है। चार प्रहर की साधना का भाव यह है कि पूरी रात्रि शिव स्मरण में बीते। भक्त प्रत्येक प्रहर में जल अर्पित करते हुए अपनी श्रद्धा, संकल्प और मनोकामना भगवान शिव को समर्पित करता है। इस तरह पूरी रात धीरे-धीरे एक निरंतर शिव साधना का रूप ले लेती है।

सावन सोमवार स्पेशल- गभस्तीश्वर महादेव मंदिर में रुद्री पाठ और चार प्रहर रात्रि महाभिषेक

सावन शिवरात्रि के व्रत और पूजन का फल

धार्मिक मान्यता के अनुसार सावन शिवरात्रि का व्रत और श्रद्धापूर्वक किया गया शिव पूजन भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का माध्यम है।
भक्त इस दिन मनोकामना पूर्ति, परिवार के मंगल, सुख-शांति, कार्यसिद्धि और आध्यात्मिक उन्नति की कामना करते हैं। शिवलिंग पर जलाभिषेक और मंत्र जाप को मन की शांति तथा शिव कृपा से जोड़ा जाता है।

हर हर महादेव!

Related Puja

आरोग्य एवं दीर्घायु के लिए 11,000 महामृत्युंजय मंत्र जाप
To receive Lord Shiva's blessings for a healthy, prosperous, and spiritually enriched life.

आरोग्य एवं दीर्घायु के लिए 11,000 महामृत्युंजय मंत्र जाप

Mon 10 August 2026
Mrityunjay Mahadev Temple, Kashi
Prasad Box
230 devotees have booked this puja
Book Puja
आरोग्य एवं दीर्घायु के लिए 11,000 महामृत्युंजय मंत्र जाप
To receive Lord Shiva's blessings for a healthy, prosperous, and spiritually enriched life.

आरोग्य एवं दीर्घायु के लिए 11,000 महामृत्युंजय मंत्र जाप

Mon 10 August 2026
Mrityunjay Mahadev Temple, Kashi
Prasad Box
230 devotees have booked this puja
Book Puja

Talk to Astrologer

View all

Connect with India's best astrologers

टैरो गौरी

टैरो गौरी

36/min₹5/min
एस्ट्रो डॉ. सुशील

एस्ट्रो डॉ. सुशील

40/min₹5/min
गजेंद्र शर्मा

गजेंद्र शर्मा

28/min₹5/min
एस्ट्रो अमन

एस्ट्रो अमन

20/min₹5/min
सुयश

सुयश

25/min₹5/min
View all
आरोग्य एवं दीर्घायु के लिए 11,000 महामृत्युंजय मंत्र जाप
To receive Lord Shiva's blessings for a healthy, prosperous, and spiritually enriched life.

आरोग्य एवं दीर्घायु के लिए 11,000 महामृत्युंजय मंत्र जाप

Mon 10 August 2026
Mrityunjay Mahadev Temple, Kashi
Prasad Box
230 devotees have booked this puja
Book Puja
सावन स्पेशल: शीघ्र विवाह के लिए पंचामृत अभिषेक और महारुद्राभिषेक
For good fortune, attraction, and auspicious marriage opportunities

सावन स्पेशल: शीघ्र विवाह के लिए पंचामृत अभिषेक और महारुद्राभिषेक

Mon 10 August 2026
Gauri Kedareshwar Mahadev Temple, Kashi
Prasad Box
349 devotees have booked this puja
Book Puja
सावन सोमवार स्पेशल- गभस्तीश्वर महादेव मंदिर में रुद्री पाठ और चार प्रहर रात्रि महाभिषेक
For planetary peace and protection from crises through Four Prahar Night Mahabhishek

सावन सोमवार स्पेशल- गभस्तीश्वर महादेव मंदिर में रुद्री पाठ और चार प्रहर रात्रि महाभिषेक

Mon 10 August 2026
Kashi, Uttar Pradesh
Prasad Box
317 devotees have booked this puja
Book Puja

Reconnect with your Faith

UserUserUser
Trusted by 1 Lakh Devotees
100% Secure