अप्रैल 2026 त्योहार कैलेंडर: Festivals in April
अप्रैल के त्योहार
| त्योहार | तिथि | वार | माह | पक्ष / तिथि | तिथि आरंभ | तिथि समापन |
|---|---|---|---|---|---|---|
| पूर्णिमा व्रत | 1 अप्रैल | बुधवार | चैत्र | शुक्ल पक्ष – पूर्णिमा | 07:06 AM, 1 अप्रैल | 07:41 AM, 2 अप्रैल |
| हनुमान जयंती / चैत्र पूर्णिमा | 2 अप्रैल | गुरुवार | चैत्र | शुक्ल पक्ष – पूर्णिमा | 07:06 AM, 1 अप्रैल | 07:41 AM, 2 अप्रैल |
| विकट संकष्ठी चतुर्थी | 5 अप्रैल | रविवार | वैशाख | कृष्ण पक्ष – चतुर्थी | 11:59 AM, 5 अप्रैल | 02:10 PM, 6 अप्रैल |
| कालाष्टमी | 10 अप्रैल | शुक्रवार | वैशाख | कृष्ण पक्ष – अष्टमी | 09:19 PM, 9 अप्रैल | 11:15 PM, 10 अप्रैल |
| वरुथिनी एकादशी | 13 अप्रैल | सोमवार | वैशाख | कृष्ण पक्ष – एकादशी | 01:16 AM, 13 अप्रैल | 01:08 AM, 14 अप्रैल |
| मेष संक्रांति / वैसाखी | 14 अप्रैल | मंगलवार | वैशाख | कृष्ण पक्ष – द्वादशी | 01:08 AM, 14 अप्रैल | 12:12 AM, 15 अप्रैल |
| प्रदोष व्रत | 15 अप्रैल | बुधवार | वैशाख | कृष्ण पक्ष – त्रयोदशी | 12:12 AM, 15 अप्रैल | 10:31 PM, 16 अप्रैल |
| वैशाख अमावस्या | 17 अप्रैल | शुक्रवार | वैशाख | कृष्ण पक्ष – अमावस्या | 08:11 PM, 16 अप्रैल | 05:21 PM, 17 अप्रैल |
| ऋषि पराशर जयंती | 18 अप्रैल | शनिवार | वैशाख | शुक्ल पक्ष – प्रतिपदा | 05:21 PM, 17 अप्रैल | 02:10 PM, 18 अप्रैल |
| स्कंद षष्ठी | 22 अप्रैल | बुधवार | वैशाख | शुक्ल पक्ष – षष्ठी | 01:19 AM, 22 अप्रैल | 10:49 PM, 22 अप्रैल |
| गंगा सप्तमी | 23 अप्रैल | गुरुवार | वैशाख | शुक्ल पक्ष – सप्तमी | 10:49 PM, 22 अप्रैल | 08:49 PM, 23 अप्रैल |
| मोहिनी एकादशी | 27 अप्रैल | सोमवार | वैशाख | शुक्ल पक्ष – एकादशी | 06:06 PM, 26 अप्रैल | 06:15 PM, 27 अप्रैल |
| प्रदोष व्रत | 28 अप्रैल | मंगलवार | वैशाख | शुक्ल पक्ष – त्रयोदशी | 06:51 PM, 28 अप्रैल | 07:51 PM, 29 अप्रैल |
हिन्दू कैलेंडर अप्रैल 2026 - व्रत एवं त्यौहार
पूर्णिमा व्रत
1 अप्रैल 2026, बुधवार को पूर्णिमा व्रत रखा जाएगा। यह व्रत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को पड़ता है, जिसे अत्यंत शुभ और पवित्र माना गया है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से धन-समृद्धि, मानसिक शांति और सौभाग्य प्राप्त होता है। भक्तजन स्नान-दान और सत्संग का विशेष महत्व मानते हैं। पूर्णिमा तिथि का आरंभ 1 अप्रैल को सुबह 07:06 बजे होगा और इसका समापन 2 अप्रैल को सुबह 07:41 बजे होगा। इस दिन व्रत-उपवास कर सच्चे मन से की गई पूजा भक्तों को विशेष पुण्य प्रदान करती है।
हनुमान जयंती
2 अप्रैल 2026, गुरुवार को हनुमान जयंती और चैत्र पूर्णिमा का पावन योग बन रहा है। चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को भगवान हनुमान जी का जन्मोत्सव पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस दिन भक्तजन उपवास रखते हैं, सुंदरकांड और हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं तथा भगवान श्रीराम के परम भक्त बजरंगबली से बल, बुद्धि और बाधा-निवारण की कामना करते हैं। पूर्णिमा तिथि का आरंभ 1 अप्रैल को सुबह 07:06 बजे हुआ और समापन 2 अप्रैल को सुबह 07:41 बजे होगा। यह दिन भक्ति, साहस और सकारात्मक ऊर्जा को जीवन में आत्मसात करने का विशेष अवसर प्रदान करता है।
संकष्ठी चतुर्थी
5 अप्रैल 2026, रविवार को विकट संकष्ठी चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा। यह व्रत वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है और इस दिन विघ्नहर्ता भगवान गणेश के विकट रूप की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस व्रत को विधि-विधान से करने पर जीवन की बड़ी से बड़ी बाधाएँ भी दूर हो जाती हैं और मनोवांछित सफलता प्राप्त होती है। चतुर्थी तिथि का प्रारंभ 5 अप्रैल को दोपहर 11:59 बजे होगा और समापन 6 अप्रैल को दोपहर 02:10 बजे होगा। संध्या के समय चंद्र दर्शन और गणेश जी की आराधना इस व्रत का मुख्य नियम माना जाता है।
कालाष्टमी
10 अप्रैल 2026, शुक्रवार को कालाष्टमी का पावन दिन मनाया जाएगा। यह व्रत वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आता है और भगवान भैरव की आराधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। भक्तजन इस दिन व्रत रखकर भैरव चालीसा का पाठ, मंदिर दर्शन और रात्रि जागरण करते हैं, जिससे भय, शत्रु और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है तथा जीवन में सुरक्षा और सफलता की प्राप्ति होती है। अष्टमी तिथि का आरंभ 9 अप्रैल को रात 09:19 बजे होगा और समापन 10 अप्रैल को रात 11:15 बजे होगा। यह दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान भैरव की कृपा प्राप्त करने का उत्तम अवसर है।
वरुथिनी एकादशी
13 अप्रैल 2026, सोमवार को वरुथिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा। यह व्रत वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को आता है और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्ति के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, इस एकादशी का पालन करने से जीवन में आने वाले कष्टों का निवारण होता है, पापों से मुक्ति मिलती है और सौभाग्य की वृद्धि होती है। एकादशी तिथि का प्रारंभ 13 अप्रैल को रात 01:16 बजे होगा और इसका समापन 14 अप्रैल को रात 01:08 बजे होगा। व्रत-पूजन और हरि स्मरण से भक्तों को विशेष पुण्य प्राप्त होता है।
मेष संक्रांति, सोलर नववर्ष और वैसाखी
14 अप्रैल 2026, मंगलवार को मेष संक्रांति, सोलर नववर्ष और वैसाखी का शुभ और मंगलकारी योग बन रहा है। इस दिन सूर्य देव मेष राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे मेष संक्रांति कहा जाता है और यह सौर नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक है। देश के अनेक क्षेत्रों में इस दिन को कृषि और नव आरंभ का पर्व माना जाता है। विशेषकर उत्तर भारत में वैसाखी बड़े उत्साह के साथ मनाई जाती है, जहां नई फसल के आगमन पर खुशियाँ मनाई जाती हैं और ईश्वर के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है। यह तिथि वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी को पड़ती है। द्वादशी तिथि का आरंभ 14 अप्रैल को रात 01:08 बजे होगा और समापन 15 अप्रैल को रात 12:12 बजे होगा। यह दिन नए संकल्प, नई उर्जा और समृद्धि का आशीर्वाद पाने का उत्तम अवसर है।
प्रदोष व्रत
15 अप्रैल 2026, बुधवार को प्रदोष व्रत रखा जाएगा। यह व्रत वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को आता है और भगवान शिव की विशेष कृपा पाने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। प्रदोष काल में शिवजी की पूजा करने से सभी प्रकार की बाधाएँ दूर होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि तथा स्वास्थ्य की वृद्धि होती है। त्रयोदशी तिथि का आरंभ 15 अप्रैल को रात 12:12 बजे होगा और समापन 16 अप्रैल को रात 10:31 बजे होगा। शिव भक्त इस दिन व्रत-उपवास रखते हैं और संध्या के समय जल, बेलपत्र और पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
वैशाख अमावस्या
17 अप्रैल 2026, शुक्रवार को वैशाख अमावस्या का पावन दिन मनाया जाएगा। अमावस्या तिथि पितरों के तर्पण और दान-पुण्य के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। इस दिन भक्तजन नदी या तीर्थ स्थल पर स्नान कर पितरों को जल अर्पित करते हैं और भगवान विष्णु व शिव की पूजा कर परिवार की शांति, समृद्धि और कष्टों के निवारण की कामना करते हैं। वैशाख अमावस्या की शुरुआत 16 अप्रैल को शाम 08:11 बजे होगी और समाप्ति 17 अप्रैल को शाम 05:21 बजे होगी। इस दिन सत्संग, भोजन दान और निर्धनों की सेवा करने से अपार पुण्य की प्राप्ति होती है।
ऋषि पराशर जयंती
वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को ऋषि पराशर जयंती मनाई जाती है। इस वर्ष यह पर्व 18 अप्रैल, शनिवार के दिन पड़ रहा है। तिथि की शुरुआत 17 अप्रैल को शाम 05:21 बजे से होगी और इसका समापन 18 अप्रैल को दोपहर 02:10 बजे पर होगा। ऋषि पराशर वेद-वेदांग के महान ज्ञाता, ज्योतिष शास्त्र के जनक और महर्षि श्री वेदव्यास जी के पिता माने जाते हैं। इस पावन अवसर पर पूजा-अर्चना कर गुरुजनों की सेवा और ज्ञान की प्रार्थना करनी चाहिए।
स्कंद षष्ठी
स्कंद षष्ठी का पावन पर्व हर वर्ष भगवान शिव और माता पार्वती के वीर पुत्र भगवान स्कंद (कार्तिकेय) को समर्पित होता है। इस वर्ष 22 अप्रैल, बुधवार को यह शुभ तिथि मनाई जाएगी। वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी 22 अप्रैल को रात 01:19 बजे से प्रारंभ होकर उसी दिन रात 10:49 बजे तक रहेगी। इस दिन भगवान स्कंद की पूजा करने से शौर्य, स्वास्थ्य और संकटों से रक्षा का आशीर्वाद प्राप्त होता है। भक्त उपवास रखते हैं और मंगलकामनाओं के लिए भगवान कार्तिकेय की आराधना करते हैं।
गंगा सप्तमी
गंगा सप्तमी का पावन पर्व वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष यह उत्सव 23 अप्रैल, गुरुवार को मनाया जाएगा। ऐसा माना जाता है कि इसी शुभ तिथि को माँ गंगा का अवतरण हुआ था। सप्तमी तिथि की शुरुआत 22 अप्रैल रात 10:49 बजे से होकर 23 अप्रैल रात 08:49 बजे तक रहेगी। इस दिन गंगा मैया की पूजा, स्नान और दान करने से पापों का नाश होता है और जीवन में पवित्रता व सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
मोहिनी एकादशी
मोहिनी एकादशी वैष्णव भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत है। यह व्रत वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। इस वर्ष मोहिनी एकादशी 27 अप्रैल, सोमवार को मनाई जाएगी। एकादशी की तिथि 26 अप्रैल शाम 06:06 बजे से शुरू होकर 27 अप्रैल शाम 06:15 बजे तक रहेगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस तिथि को भगवान विष्णु ने असुरों को मोहित कर अमृत की रक्षा करने हेतु मोहिनी रूप धारण किया था। इसलिए इस व्रत का नाम मोहिनी एकादशी पड़ा। इस व्रत को रखने से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं, पापों का नाश होता है और विष्णु कृपा प्राप्त होती है।
प्रदोष व्रत
प्रदोष व्रत भगवान शिव की आराधना के प्रमुख व्रतों में से एक है, जिसे हर शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर किया जाता है। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष का प्रदोष व्रत 28 अप्रैल, मंगलवार के दिन मनाया जाएगा। त्रयोदशी तिथि 28 अप्रैल शाम 06:51 बजे से प्रारंभ होकर 29 अप्रैल शाम 07:51 बजे तक रहेगी। इस व्रत में दिनभर उपवास रखकर, प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के समय भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा की जाती है। मान्यता है कि प्रदोष व्रत करने से जीवन में समृद्धि, संतोष और शुभ फल प्राप्त होते हैं तथा सभी कष्ट दूर होकर शिव कृपा सदैव बनी रहती है।

