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नवंबर 2026 त्योहार कैलेंडर: Festivals in November

Supriya Kandwal Supriya Kandwal Updated 2 Dec 2025

नवंबर के त्योहार

त्योहारअंग्रेजी दिनवारमाहपक्ष / तिथितिथि आरंभतिथि समापन
अहोई अष्टमी, कालाष्टमी1 नवंबररविवारकार्तिककृष्ण पक्ष – अष्टमी02:51 PM, 1 नवंबर01:10 PM, 2 नवंबर
रमा एकादशी5 नवंबरगुरुवारकार्तिककृष्ण पक्ष – एकादशी11:03 AM, 4 नवंबर10:35 AM, 5 नवंबर
धनतेरस, यम दीपम, यम पंचक, प्रदोष व्रत6 नवंबरशुक्रवारकार्तिककृष्ण पक्ष – त्रयोदशी10:35 AM, 5 नवंबर10:47 AM, 6 नवंबर
काली चौदस, हनुमान पूजा, मासिक शिवरात्रि7 नवंबरशनिवारकार्तिककृष्ण पक्ष – चतुर्दशी10:47 AM, 7 नवंबर11:27 AM, 8 नवंबर
लक्ष्मी पूजा, नरक चतुर्दशी, दीपावली, काली पूजा8 नवंबररविवारकार्तिककृष्ण पक्ष – चतुर्दशी / अमावस्या11:27 AM, 8 नवंबर12:31 PM, 9 नवंबर
कार्तिक अमावस्या9 नवंबरसोमवारकार्तिककृष्ण पक्ष – अमावस्या12:31 PM, 9 नवंबर12:31 PM, 9 नवंबर
गोवर्धन पूजा, अन्नकूट10 नवंबरमंगलवारकार्तिकशुक्ल पक्ष – प्रतिपदा12:31 PM, 9 नवंबर02:00 PM, 10 नवंबर
भैया दूज, यम द्वितीया11 नवंबरबुधवारकार्तिकशुक्ल पक्ष – द्वितीया02:00 PM, 10 नवंबर03:53 PM, 11 नवंबर
लाभ चतुर्थी13 नवंबरशुक्रवारकार्तिकशुक्ल पक्ष – चतुर्थी06:09 PM, 12 नवंबर08:42 PM, 13 नवंबर
लाभ पंचमी14 नवंबरशनिवारकार्तिकशुक्ल पक्ष – पंचमी08:42 PM, 13 नवंबर11:23 PM, 14 नवंबर
छठ पूजा, स्कंद षष्ठी15 नवंबररविवारकार्तिकशुक्ल पक्ष – षष्ठी11:23 PM, 14 नवंबर02:00 AM, 16 नवंबर
वृश्चिक संक्रांति16 नवंबरसोमवारकार्तिकशुक्ल पक्ष – सप्तमी / संक्रांति02:00 AM, 16 नवंबर04:19 AM, 17 नवंबर
गोपाष्टमी17 नवंबरमंगलवारकार्तिकशुक्ल पक्ष – अष्टमी04:19 AM, 17 नवंबर06:04 AM, 18 नवंबर
अक्षय नवमी18 नवंबरबुधवारकार्तिकशुक्ल पक्ष – नवमी06:04 AM, 18 नवंबर07:05 AM, 19 नवंबर
देव उठनी एकादशी20 नवंबरशुक्रवारकार्तिकशुक्ल पक्ष – एकादशी07:15 AM, 19 नवंबर06:31 AM, 21 नवंबर
तुलसी विवाह21 नवंबरशनिवारकार्तिकशुक्ल पक्ष – द्वादशी06:31 AM, 21 नवंबर04:56 AM, 22 नवंबर
प्रदोष व्रत22 नवंबररविवारकार्तिकशुक्ल पक्ष – त्रयोदशी04:56 AM, 22 नवंबर02:36 AM, 23 नवंबर
वैकुण्ठ चतुर्दशी23 नवंबरसोमवारकार्तिकशुक्ल पक्ष – चतुर्दशी02:36 AM, 23 नवंबर11:42 PM, 24 नवंबर
देव दीपावली, गुरु नानक जयंती, कार्तिक पूर्णिमा24 नवंबरमंगलवारकार्तिकशुक्ल पक्ष – पूर्णिमा11:42 PM, 24 नवंबर08:23 PM, 25 नवंबर

हिन्दू कैलेंडर नवंबर 2026 - व्रत एवं त्यौहार

अहोई अष्टमी / कालाष्टमी – 1 नवंबर 2026 (रविवार)

कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 1 नवंबर दोपहर 02:51 बजे से प्रारंभ होकर 2 नवंबर दोपहर 01:10 बजे समाप्त होगी। इस दिन माताएं अपने संतानों की दीर्घायु और सुखमय जीवन के लिए अहोई माता का व्रत रखती हैं। शाम के समय तारों की छांव में अहोई माता की पूजा और कथा का विधान है। इसके साथ ही इस दिन कालाष्टमी भी मनाई जाती है, जो भगवान भैरव को समर्पित है। भक्त भैरव जी की पूजा कर सुरक्षा और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति की कामना करते हैं। यह दिन बच्चे और परिवार के कल्याण के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।

रमा एकादशी – 5 नवंबर 2026 (गुरुवार)

कार्तिक कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 4 नवंबर सुबह 11:03 बजे से शुरू होकर 5 नवंबर सुबह 10:35 बजे तक रहेगी। इस एकादशी को रमा देवी और भगवान विष्णु की उपासना हेतु श्रेष्ठ माना गया है। रमा एकादशी व्रत करने से पापों का क्षय होता है और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। व्रतधारी सूर्योदय से पहले स्नान कर व्रत का संकल्प लेते हैं और पूरे दिन भगवान विष्णु के नाम का कीर्तन-भजन करते हैं। दान-पुण्य और जरूरतमंदों की सहायता इस दिन अत्यंत फलदायी मानी जाती है।

धनतेरस / यम दीपम / प्रदोष व्रत / यम पंचक – 6 नवंबर 2026 (शुक्रवार)

कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 5 नवंबर सुबह 10:35 बजे से 6 नवंबर सुबह 10:47 बजे तक रहेगी। इस दिन धन्वंतरि जयंती, धनतेरस, यम दीपम और प्रदोष व्रत मनाए जाते हैं। लोग सोना, चांदी, बर्तन तथा नए सामान खरीदकर घर में सुख-संपन्नता का स्वागत करते हैं। शाम को घर के प्रवेश द्वार पर दीपक जलाकर यमराज की कृपा और आरोग्य की कामना की जाती है। भगवान शिव और माता लक्ष्मी की पूजा से आर्थिक उन्नति और पारिवारिक खुशहाली का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

काली चौदस / हनुमान पूजा / मासिक शिवरात्रि – 7 नवंबर 2026 (शनिवार)

कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर सुबह 10:47 बजे से 8 नवंबर सुबह 11:27 बजे तक रहेगी। इसे नरक चतुर्दशी या रूप चतुर्दशी भी कहा जाता है। इस दिन मां काली और भगवान हनुमान की विशेष पूजा करने का विधान है। माना जाता है कि इस दिन राक्षसों और नकारात्मक शक्तियों का अंत हुआ था। साथ ही मासिक शिवरात्रि होने से भगवान शिव की उपासना अत्यंत फलदायी मानी जाती है। भक्त स्नान, दीपदान और तांत्रिक साधना से भय और पापों से मुक्ति की कामना करते हैं।

लक्ष्मी पूजा / नरक चतुर्दशी / दीपावली / काली पूजा — 8 नवंबर 2026 (रविवार)

कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 8 नवंबर सुबह 11:27 बजे से 9 नवंबर दोपहर 12:31 बजे तक है। इस दिन पूरे देश में दीपावली का उल्लास फैला होता है। सुबह नरक चतुर्दशी के समय लक्ष्मी पूजा कर धन-समृद्धि का स्वागत किया जाता है। घर-घर में दीपक, रंगोली और मिठाई-नवरात्र स्वाद से सजते हैं। काली पूजा और हनुमान भक्तिमय प्रार्थना से अंधकार पर विजय का दृश्य बनता है। यह पर्व आत्मशुद्धि, संबंधों की मिठास और सामाजिक मेल-जोल का प्रतीक है।

कार्तिक अमावस्या — 9 नवंबर 2026 (सोमवार)

कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 9 नवंबर दोपहर 12:31 बजे से समाप्ति भी उसी दिन दोपहर 12:31 बजे तक है। यह दिन पितृ-शांति और श्राद्ध की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। अमावस्या के दिन स्नान, तर्पण और दान-पुण्य का विशेष महत्व है। पितर अपने वंशजों के द्वारा की गई सेवा को स्वीकारते हैं और आशीर्वाद देते हैं। इस दिन की गई पूजा-अर्चना से पितृदोष निवारण होता है तथा पारिवारिक सद्भाव बढ़ता है।

गोवर्धन पूजा / अन्नकूट — 10 नवंबर 2026 (मंगलवार)

कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 9 नवंबर दोपहर 12:31 बजे से 10 नवंबर दोपहर 02:00 बजे तक है। इसी दिन भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को उठा कर गोकुलवासियों बचाया था, इसलिए गोवर्धन पूजा मनाई जाती है। भक्त 56 तरह का अन्न-भोग बनाते हैं, जिसे अन्नकूट कहा जाता है। इसे कृष्णजी को समर्पित कर दान-पुण्य किया जाता है। पर्यावरण-सुरक्षा और प्रेम-भक्ति का संदेश इस दिन विशेष रूप से मिलता है।

भैया दूज / यम द्वितीया — 11 नवंबर 2026 (बुधवार)

कार्तिक शुक्ल द्वितीया तिथि 10 नवंबर दोपहर 02:00 बजे से 11 नवंबर दोपहर 03:53 बजे तक रहेगी। इस दिन भाई–बहन के रिश्ते का पर्व भैया दूज मनाया जाता है। बहनें अपने भाई की लंबी आयु, रक्षा और सफलता की कामना करती हैं। यमराज के प्रति भी विशेष श्रद्धा दिखाई जाती है, इसलिए इसे यम द्वितीया कहा जाता है। घर-परिवार में मिठाई बाँटने, राखी-सिंदूर-फूल और भाई का तिलक लगाने की परंपरा पूरी होती है। यह पर्व प्रेम, सुरक्षा और पारिवारिक बंधन को सुदृढ़ करता है।

लाभ चतुर्थी — 13 नवंबर 2026 (गुरुवार)

कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 12 नवंबर शाम 06:09 बजे से 13 नवंबर रात 08:42 बजे तक रहेगी। इस दिन भगवान गणेश की पूजा कर धन, भाग्य और व्यवसाय वृद्धि की कामना की जाती है। इसे लाभ चतुर्थी इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस दिन किए गए पूजन से जीवन में लाभ के अवसर बढ़ते हैं। व्यापारी वर्ग, विद्यार्थी और नए कार्य शुरू करने वाले लोगों के लिए यह अत्यंत शुभ मानी जाती है। विघ्नहर्ता गणेश आशीर्वाद देकर मनोकामना पूरी करते हैं।

लाभ पंचमी — 14 नवंबर 2026 (शुक्रवार)

कार्तिक शुक्ल पंचमी तिथि 13 नवंबर रात 08:42 बजे से 14 नवंबर रात 11:23 बजे तक है। इसे व्यवसाय की दृष्टि से वर्ष का सबसे शुभ दिन माना जाता है। कई जगह इसी दिन नया लेखा-जोखा आरंभ किया जाता है। मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा कर धन-संग्रह, तरक्की और आर्थिक सुरक्षा का आशीर्वाद लिया जाता है। यह दिन पुराने कर्ज से मुक्ति और नए आय स्रोतों की प्राप्ति का संकेत देता है।

छठ पूजा / स्कंद षष्ठी — 15 नवंबर 2026 (शनिवार)

कार्तिक शुक्ल षष्ठी तिथि 14 नवंबर रात 11:23 बजे से 16 नवंबर सुबह 02:00 बजे तक है। छठ पूजा मुख्य रूप से सूर्य देव और छठी मइया को समर्पित है। व्रती 4 दिनों तक कठिन व्रत रखते हैं और उगते–डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। संतान सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना से यह पर्व पूरे उत्तर भारत में अत्यंत श्रद्धा से मनाया जाता है। इसी दिन स्कंद षष्ठी भी मनाई जाती है, जिसमें भगवान कार्तिकेय की आराधना की जाती है।

वृश्चिक संक्रांति — 16 नवंबर 2026 (रविवार)

इस दिन सूर्य वृश्चिक राशि में प्रवेश करते हैं। संक्रांति काल 16 नवंबर सुबह 02:00 बजे से अगले दिन 04:19 बजे तक रहेगा। यह दिन धार्मिक स्नान, दान और पितरों की कृपा प्राप्त करने के लिए बेहद शुभ होता है। सूर्य उपासना, तिल-दान और गाय की सेवा से पुण्यफल मिलता है। आध्यात्मिक उन्नति और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा का यह विशेष अवसर माना जाता है।

गोपाष्टमी — 17 नवंबर 2026 (सोमवार)

कार्तिक शुक्ल अष्टमी तिथि 17 नवंबर सुबह 04:19 बजे से 18 नवंबर सुबह 06:04 बजे तक रहेगी। गोपाष्टमी का यह पावन दिन गाय और गौ-सेवा को समर्पित है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने पहली बार गोचारण (गाय चराना) शुरू किया था, इसलिए यह विशेष माना जाता है। गौमाता की पूजा, उन्हें चारा खिलाना और उनकी सेवा करने से जीवन में सौभाग्य, धन और परिवार की रक्षा होती है। ब्रज सहित पूरे भारत में यह पर्व बेहद आस्था के साथ मनाया जाता है।

अक्षय नवमी — 18 नवंबर 2026 (मंगलवार)

कार्तिक शुक्ल नवमी तिथि 18 नवंबर सुबह 06:04 बजे से 19 नवंबर सुबह 07:05 बजे तक है। अक्षय नवमी को देवी अन्नपूर्णा एवं आंवले के पेड़ की विशेष पूजा की जाती है। इस दिन किया गया दान-पुण्य अक्षय यानी कभी न खत्म होने वाला फल प्रदान करता है। कृषि कार्य और धन वृद्धि के लिए यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है। कई क्षेत्रों में इसे सप्तमी के समान ही तुलसी विवाह की शुरुआत भी माना जाता है। यह नवमी ग्रह दोष शांत करने के लिए भी श्रेष्ठ दिन है।

देव उठनी एकादशी — 20 नवंबर 2026 (गुरुवार)

कार्तिक शुक्ल एकादशी तिथि 19 नवंबर सुबह 07:15 बजे से 21 नवंबर सुबह 06:31 बजे तक रहेगी। मान्यता है कि चार महीने योगनिद्रा में रहने के बाद इसी दिन भगवान विष्णु जागृत होते हैं। इस दिन से सभी मांगलिक कार्य पुनः आरंभ हो जाते हैं। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और सौभाग्य की वृद्धि होती है। व्रत रखकर भजन-कीर्तन करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।

तुलसी विवाह — 21 नवंबर 2026 (शुक्रवार)

कार्तिक शुक्ल द्वादशी तिथि 21 नवंबर सुबह 06:31 बजे से 22 नवंबर सुबह 04:56 बजे तक है। इस दिन तुलसी जी का भगवान शालिग्राम (विष्णु स्वरूप) से विवाह कराया जाता है। इसे दिव्य और आध्यात्मिक विवाह माना जाता है। तुलसी विवाह के साथ गृहस्थ जीवन की खुशहाली और मांगलिक कार्यों की पुनः शुरुआत का संदेश मिलता है। इस दिन किया गया पूजा-पाठ एवं दान अत्यंत पुण्यदायी होता है।

प्रदोष व्रत — 22 नवंबर 2026 (शनिवार)

कार्तिक शुक्ल त्रयोदशी तिथि 22 नवंबर सुबह 04:56 बजे से 23 नवंबर सुबह 02:36 बजे तक है। यह व्रत भगवान शिव को समर्पित माना जाता है और विशेष रूप से संध्या समय पूजा करना शुभ होता है। प्रदोष व्रत से कर्ज़ से मुक्ति, स्वास्थ्य सुधार और परिवार में सुख-शांति की प्राप्ति होती है। विवाहित जीवन में मधुरता और संतान सुख के लिए भी यह व्रत अत्यंत फलदायी है। भक्त शिवलिंग पर जल, दूध और बिल्वपत्र अर्पित कर अपने मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना करते हैं।

वैकुण्ठ चतुर्दशी — 23 नवंबर 2026 (रविवार)

कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी तिथि 23 नवंबर सुबह 02:36 बजे से 24 नवंबर रात 11:42 बजे तक रहेगी। यह पावन दिन भगवान विष्णु और भगवान शिव की संयुक्त पूजा के लिए विशेष माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु ने शिवजी की तपस्या कर वैकुण्ठ लोक का मार्ग प्राप्त किया था। इस दिन किया गया पुण्य अक्षय फल देता है। व्रत, दीपदान और भजन-कीर्तन से जीवन में समृद्धि, रोग-निवारण और सभी बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

देव दीपावली — 24 नवंबर 2026 (सोमवार)

कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा तिथि 24 नवंबर रात 11:42 बजे से 25 नवंबर रात 08:23 बजे तक है। इसे देवताओं की दीपावली कहा जाता है और यह पर्व काशी में विशेष रूप से मनाया जाता है। इस दिन गंगा घाटों पर हजारों दीये जलाकर देवताओं का स्वागत किया जाता है। भगवान शिव और गंगा माता की पूजा से पापों का विनाश होता है और घर में शुभ ऊर्जा आती है। यह धन, सौभाग्य और आध्यात्मिक विकास का श्रेष्ठ दिन माना जाता है।

गुरु नानक जयंती — 24 नवंबर 2026 (सोमवार)

यह दिन पहले सिख गुरु, गुरु नानक देव जी का प्रकाश पर्व है। गुरुद्वारों में कीर्तन, लंगर और प्रभात फेरियों का आयोजन होता है। गुरु नानक देव जी ने “सबका मालिक एक” और “निष्काम सेवा” का संदेश दिया। उनके उपदेश मानवता को एकता, प्रेम, और समानता की राह दिखाते हैं। इस दिन जरूरतमंदों की सेवा और नाम-सिमरन को विशेष महत्व दिया जाता है।

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