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फरवरी 2026 त्योहार कैलेंडर: Festivals in February

Supriya Kandwal Supriya Kandwal Updated 2 Dec 2025

फरवरी के त्योहार

त्योहारअंग्रेजी दिनवारमाहपक्ष/तिथितिथि आरंभतिथि समापन
माघ पूर्णिमा1 फरवरीरविवारफाल्गुनशुक्ल-पूर्णिमा05:52 ए एम, 1 फरवरी03:38 ए एम, 2 फरवरी
कालाष्टमी9 फरवरीसोमवारफाल्गुनकृष्ण-अष्टमी06:53 पी एम03:32 पी एम
कुंभ संक्रांति / विजया एकादशी13 फरवरीशुक्रवारफाल्गुनकृष्ण-एकादशी12:22 पी एम02:25 पी एम
शनि त्रयोदशी / वैलेनटाइन डे / प्रदोष व्रत14 फरवरीशनिवारफाल्गुनकृष्ण-त्रयोदशी04:01 पी एम, 13 फरवरी05:04 पी एम
महाशिवरात्रि15 फरवरीरविवारफाल्गुनकृष्ण-चतुर्दशी05:04 पी एम, 14 फरवरी05:34 पी एम
सूर्य ग्रहण / फाल्गुन अमावस्या17 फरवरीमंगलवारफाल्गुनकृष्ण-अमावस्या05:34 पी एम, 16 फरवरी05:30 पी एम, 17 फरवरी
फुलेरा दूज19 फरवरीगुरुवारफाल्गुनशुक्ल-द्वितीया04:57 पी एम, 18 फरवरी03:58 पी एम
स्कंद षष्ठी22 फरवरीरविवारफाल्गुनशुक्ल-षष्ठी11:09 ए एम, 22 फरवरी09:09 ए एम, 23 फरवरी
आमलकी एकादशी27 फरवरीशुक्रवारफाल्गुनशुक्ल-एकादशी12:33 ए एम, 27 फरवरी10:32 पी एम, 28 फरवरी
नरसिंह द्वादशी28 फरवरीशनिवारफाल्गुनशुक्ल-द्वादशी10:32 पी एम, 28 फरवरी08:43 पी एम

हिन्दू कैलेंडर फरवरी 2026 - व्रत एवं त्यौहार

माघ पूर्णिमा

माघ पूर्णिमा का हिंदू धर्म में अत्यंत विशेष महत्व माना गया है। इस दिन गंगा स्नान, दान-पुण्य और धार्मिक अनुष्ठान करने से अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है तथा जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं। वर्ष 2026 में माघ पूर्णिमा का यह पावन पर्व 1 फरवरी, रविवार को मनाया जाएगा। यह फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को पड़ेगा। पूर्णिमा तिथि 1 फरवरी को प्रातः 5 बजकर 52 मिनट पर प्रारंभ होकर 2 फरवरी को प्रातः 3 बजकर 38 मिनट पर समाप्त होगी। मान्यता है कि इस दिन किया गया जप, तप, यज्ञ और दान अनेक गुना फल प्रदान करता है। माघ पूर्णिमा पर स्नान और पूजा के माध्यम से भक्त आध्यात्मिक शुद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति की कामना करते हैं।

कालाष्टमी

कालाष्टमी भगवान काल भैरव की आराधना का महत्वपूर्ण और फलदायी पर्व है। इस दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा, तैलाभिषेक और रात्रि जागरण करने से भय, बाधाएँ और नकारात्मक शक्तियाँ दूर होती हैं। वर्ष 2026 में कालाष्टमी का यह पावन अवसर 9 फरवरी, सोमवार को मनाया जाएगा। यह फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को पड़ेगा। तिथि का प्रारंभ 8 फरवरी को सायंकाल 6 बजकर 53 मिनट पर होगा और इसका समापन 9 फरवरी को दोपहर 3 बजकर 32 मिनट पर होगा। धार्मिक मान्यता है कि कालाष्टमी के दिन काल भैरव की आराधना करने से जीवन में सुरक्षात्मक शक्ति का संचार होता है, कष्टों का नाश होता है और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।

कुंभ संक्रांति और विजया एकादशी

कुंभ संक्रांति और विजया एकादशी दोनों ही अत्यंत शुभ और पुण्य फलदायी तिथियाँ मानी जाती हैं। कुंभ संक्रांति के दिन सूर्य देव मकर से कुंभ राशि में प्रवेश करते हैं, जिसके कारण इस दिन विशेष रूप से दान-पुण्य और स्नान का महत्व बढ़ जाता है। वहीं विजया एकादशी भगवान विष्णु की भक्ति के लिए समर्पित पावन व्रत है, जिसे जीवन में विजय और सफलता प्रदान करने वाला माना गया है। वर्ष 2026 में यह दोनों पर्व 13 फरवरी, शुक्रवार को मनाए जाएंगे। यह फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाएगा। एकादशी तिथि इस दिन दोपहर 12 बजकर 22 मिनट से प्रारंभ होकर 14 फरवरी दोपहर 2 बजकर 25 मिनट तक रहेगी। विजया एकादशी के व्रत से पापों का नाश होता है और सभी कार्यों में शुभ फल प्राप्त होते हैं, जबकि कुंभ संक्रांति पर किया गया दान अनंत गुना फल प्रदान करता है।

शनि त्रयोदशी

14 फरवरी के दिन शनि त्रयोदशी, प्रदोष व्रत और वैलेनटाइन डे एक साथ पड़ रहे हैं। शनि त्रयोदशी पर भगवान शनि की पूजा करने से ग्रहदोषों का निवारण होता है, जीवन की कठिनाइयाँ कम होती हैं और कार्यों में सफलता मिलती है। वहीं प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है, जिसमें प्रदोष काल में विशेष पूजा करने से सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। इसके साथ ही आधुनिक उत्सव वैलेनटाइन डे प्रेम, स्नेह और रिश्तों को समर्पित है, जिसे युवा खास उत्साह के साथ मनाते हैं। वर्ष 2026 में यह सभी पर्व 14 फरवरी, शनिवार को मनाए जाएंगे। यह फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को पड़ेगा। त्रयोदशी तिथि 13 फरवरी को शाम 4 बजकर 01 मिनट पर प्रारंभ होकर 14 फरवरी को शाम 5 बजकर 04 मिनट पर समाप्त होगी। इस दिन शनि और शिव की कृपा के साथ प्रेम और सकारात्मक भावनाओं का उत्सव मनाने का एक सुंदर अवसर प्राप्त होता है।

फाल्गुन अमावस्या

फाल्गुन अमावस्या का दिन हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना गया है। इस दिन किया गया दान, जप, तप और पितरों के लिए तर्पण विशेष फल देता है। वर्ष 2026 में इस तिथि पर सूर्य ग्रहण भी लगेगा, जिसके कारण इसका धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ जाएगा। ग्रहण काल में मंत्र-जप और ध्यान अत्यंत शुभ माना जाता है, जबकि सूतक काल में भोजन, देवी-देवताओं का स्पर्श और किसी भी शुभ कार्य को करने की मनाही होती है। वर्ष 2026 में सूर्य ग्रहण और फाल्गुन अमावस्या का यह संयोग 17 फरवरी, मंगलवार को पड़ेगा। यह फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाया जाएगा। अमावस्या तिथि का प्रारंभ 16 फरवरी को शाम 5 बजकर 34 मिनट पर होगा और समापन 17 फरवरी को शाम 5 बजकर 30 मिनट पर होगा। इस दिव्य संयोग पर ग्रह दोष निवारण और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति हेतु भगवान की आराधना विशेष लाभ प्रदान करती है।

फुलेरा दूज

फुलेरा दूज फाल्गुन मास में मनाया जाने वाला एक शुभ और हर्षोल्लासपूर्ण त्योहार है, जिसे विशेष रूप से भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की भक्ति के लिए अत्यंत मंगलकारी माना जाता है। माना जाता है कि इस दिन से रंगों के त्योहार होली की शुरुआत का संकेत मिल जाता है और मंदिरों में अबीर-गुलाल से विशेष झाँकियाँ सजाई जाती हैं। वर्ष 2026 में फुलेरा दूज का यह पावन पर्व 19 फरवरी, गुरुवार को मनाया जाएगा। यह फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को पड़ेगा। द्वितीया तिथि 18 फरवरी को सायं 4 बजकर 57 मिनट पर प्रारंभ होकर 19 फरवरी को सायं 3 बजकर 58 मिनट पर समाप्त होगी। इस दिन राधा-कृष्ण की पूजा, भजन-कीर्तन और प्रेम व सौहार्द बढ़ाने वाले कार्य करने से घर-परिवार में खुशहाली और मधुरता बनी रहती है।

स्कंद षष्ठी

गवान कार्तिकेय, जिन्हें स्कंद, मुरुगन और कुमारस्वामी के नाम से भी जाना जाता है, की उपासना का अत्यंत शुभ पर्व है। इस दिन भक्तजन साहस, विजय, स्वास्थ्य और संतान सुख की कामना से व्रत एवं पूजा-अर्चना करते हैं। वर्ष 2026 में स्कंद षष्ठी 22 फरवरी, रविवार को मनाई जाएगी। यह फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को पड़ेगी। षष्ठी तिथि 22 फरवरी को प्रातः 11 बजकर 09 मिनट पर शुरू होकर 23 फरवरी को प्रातः 09 बजकर 09 मिनट पर समाप्त होगी। मान्यता है कि इस दिन भगवान कार्तिकेय की पूजा करने से कार्यों में सफलता मिलती है, भय दूर होता है और जीवन में शक्ति तथा पराक्रम की वृद्धि होती है।

आमलकी एकादशी

भगवान विष्णु की भक्ति का अत्यंत शुभ और पुण्यकारी व्रत है, जिसे विशेष रूप से आंवले के वृक्ष की पूजा के लिए जाना जाता है। आंवला औषधीय गुणों से भरपूर और पुण्यदायी माना गया है, इसलिए इस दिन इसके तले पूजा करने से शरीर, मन और आत्मा को शुद्धि प्राप्त होती है। वर्ष 2026 में आमलकी एकादशी का व्रत 27 फरवरी, शुक्रवार को रखा जाएगा। यह फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पड़ेगा। एकादशी तिथि 27 फरवरी को रात्रि 12 बजकर 33 मिनट पर प्रारंभ होकर 28 फरवरी को रात्रि 10 बजकर 32 मिनट पर समाप्त होगी। इस दिन उपवास, भगवान विष्णु की आराधना और आंवले के सेवन से समस्त पापों का नाश होता है तथा जीवन में सुख-समृद्धि, दीर्घायु और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

नरसिंह द्वादशी

नरसिंह द्वादशी का पावन पर्व 28 फरवरी 2026, शनिवार के दिन मनाया जाएगा। हिन्दू पंचांग के अनुसार यह तिथि फ़ाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी को पड़ती है। इस दिन भगवान विष्णु के अवतार भगवान नरसिंह की उपासना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत को रखने और पूजन करने से भय, कष्ट और संकटों से मुक्ति मिलती है। इस वर्ष द्वादशी तिथि 28 फरवरी की रात 08:43 बजे से प्रारंभ होकर 29 फरवरी की रात 10:32 बजे तक रहेगी। भक्तगण शुद्ध मन से व्रत रखकर भगवान नरसिंह की पूजा-अर्चना कर अपने जीवन में सुख-शांति और रक्षा की कामना करते हैं।

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