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दिसंबर 2026 त्योहार कैलेंडर: Festivals in December

Supriya Kandwal Supriya Kandwal Updated 2 Dec 2025

दिसंबर के त्योहार

त्योहारअंग्रेजी दिनवारमाहपक्ष / तिथितिथि आरंभतिथि समापन
काल भैरव जयंती, कालाष्टमी1 दिसंबरमंगलवारमार्गशीर्षकृष्ण पक्ष – अष्टमी11:36 PM, 31 नवंबर11:13 PM, 1 दिसंबर
उत्पन्ना एकादशी4 दिसंबरशुक्रवारमार्गशीर्षकृष्ण पक्ष – एकादशी11:03 PM, 3 दिसंबर11:44 PM, 4 दिसंबर
प्रदोष व्रत6 दिसंबररविवारमार्गशीर्षकृष्ण पक्ष – त्रयोदशी12:51 AM, 6 दिसंबर02:22 AM, 7 दिसंबर
मार्गशीर्ष अमावस्या8 दिसंबरमंगलवारमार्गशीर्षकृष्ण पक्ष – अमावस्या04:12 AM, 8 दिसंबर06:21 AM, 9 दिसंबर
विवाह पंचमी14 दिसंबरसोमवारमार्गशीर्षशुक्ल पक्ष – पंचमी04:47 PM, 13 दिसंबर07:15 PM, 14 दिसंबर
स्कंद षष्ठी15 दिसंबरमंगलवारमार्गशीर्षशुक्ल पक्ष – षष्ठी07:15 PM, 14 दिसंबर09:19 PM, 15 दिसंबर
धनु संक्रांति16 दिसंबरबुधवारमार्गशीर्षशुक्ल पक्ष – सप्तमी / संक्रांति09:19 PM, 15 दिसंबर10:45 PM, 16 दिसंबर
वैकुण्ठ, मोक्षदा एकादशी20 दिसंबररविवारमार्गशीर्षशुक्ल पक्ष – एकादशी10:09 PM, 19 दिसंबर08:14 PM, 20 दिसंबर
प्रदोष व्रत21 दिसंबरसोमवारमार्गशीर्षशुक्ल पक्ष – त्रयोदशी05:36 PM, 21 दिसंबर02:23 PM, 22 दिसंबर
साल का सबसे छोटा दिन22 दिसंबरमंगलवारमार्गशीर्षशुक्ल पक्ष – चतुर्दशी02:23 PM, 22 दिसंबर10:47 AM, 23 दिसंबर
मार्गशीर्ष पूर्णिमा23 दिसंबरबुधवारमार्गशीर्षशुक्ल पक्ष – पूर्णिमा10:47 AM, 23 दिसंबर06:57 AM, 24 दिसंबर
कालाष्टमी30 दिसंबरबुधवारपौषकृष्ण पक्ष – अष्टमी12:36 PM, 30 दिसंबर12:32 PM, 31 दिसंबर

हिन्दू कैलेंडर दिसंबर 2026 - व्रत एवं त्यौहार

काल भैरव जयंती एवं कालाष्टमी (1 दिसंबर – मंगलवार)

मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को काल भैरव जयंती और कालाष्टमी मनाई जाती है। भगवान शिव के रौद्र रूप काल भैरव की यह जयंती रात्रि में पूजने की परंपरा है। माना जाता है कि इस पूजा से भय, रोग और शत्रुओं से रक्षा होती है। कुत्तों को भोजन कराना अत्यंत शुभ माना गया है। इस वर्ष अष्टमी तिथि 31 नवंबर रात 11:36 बजे से शुरू होकर 1 दिसंबर रात 11:13 बजे तक रहेगी। इस शुभ समय में भैरव चालीसा, तिल के तेल का दीप और रात्रि जागरण का विशेष महत्व है।

उत्पन्ना एकादशी (4 दिसंबर – शुक्रवार)

उत्पन्ना एकादशी को भगवान विष्णु की आराधना एवं उपवास से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि इसी दिन एकादशी देवी का प्रकट हुआ था। मानसिक शांति, पापों का नाश और मोक्ष की राह खुलती है। इस वर्ष एकादशी तिथि 3 दिसंबर रात 11:03 बजे से 4 दिसंबर रात 11:44 बजे तक रहेगी। इस दौरान श्रीहरि नामस्मरण, गीता पाठ, दान-पुण्य और रात्रि जागरण शुभ माना गया है।

प्रदोष व्रत (6 दिसंबर – रविवार)

भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित यह व्रत त्रयोदशी की संध्या बेला में रखा जाता है। संध्या के समय शिवलिंग पर जलाभिषेक, धूप-दीप, बिल्वपत्र चढ़ाने से दांपत्य सुख, स्वास्थ्य और शत्रु बाधा से मुक्ति मिलती है। इस बार त्रयोदशी तिथि 6 दिसंबर रात 12:51 बजे से 7 दिसंबर तड़के 2:22 बजे तक रहेगी। सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में की गई पूजा अत्यंत शुभफलदायी मानी गई है।

मार्गशीर्ष अमावस्या (8 दिसंबर – मंगलवार)

मार्गशीर्ष की अमावस्या पितृ तर्पण, दान-पुण्य और कल्याणकारी कार्यों के लिए बेहद शुभ है। इस दिन विष्णु भगवान की पूजा और गंगा स्नान का विशेष महत्व है। घर में दीपदान और पितरों के नाम जल अर्पण करने से पितृदोष दूर होता है और शांति व समृद्धि आती है। इस बार अमावस्या तिथि 8 दिसंबर सुबह 4:12 बजे शुरू होकर 9 दिसंबर सुबह 6:21 बजे समाप्त होगी। सुबह के समय की पूजा सबसे शुभ मानी गई है।

उत्पन्ना एकादशी — 4 दिसंबर

उत्पन्ना एकादशी 4 दिसंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। यह व्रत मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को पड़ता है। एकादशी तिथि 3 दिसंबर रात 11:03 बजे से शुरू होकर 4 दिसंबर रात 11:44 बजे तक रहेगी। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी प्रकार के पापों का नाश होता है और मोक्ष का मार्ग खुलता है। व्रत रखने वाले भक्त पूरे दिन उपवास करते हुए हरि नाम संकीर्तन करते हैं और रात्रि में जागरण भी किया जाता है। पवित्र मन और सात्विक भोजन के साथ किए गए इस व्रत से जीवन में मानसिक शांति, सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।

प्रदोष व्रत — 6 दिसंबर

प्रदोष व्रत 6 दिसंबर, रविवार को रखा जाएगा। यह व्रत मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को आता है। तिथि का समय 6 दिसंबर रात 12:51 बजे से शुरू होकर 7 दिसंबर सुबह 02:22 बजे तक रहेगा। यह व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने वाला माना गया है और संध्या काल में की गई पूजा अत्यंत शुभ होती है। इस दिन शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र चढ़ाने से मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं। प्रदोष व्रत विशेषकर स्वास्थ्य, दांपत्य सुख, कर्ज मुक्ति और समृद्धि प्रदान करने वाला माना गया है।

मार्गशीर्ष अमावस्या — 8 दिसंबर

मार्गशीर्ष अमावस्या 8 दिसंबर, मंगलवार को पड़ रही है। यह तिथि मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष का अंतिम दिन है। अमावस्या की शुरुआत 8 दिसंबर सुबह 04:12 बजे से होकर 9 दिसंबर सुबह 06:21 बजे तक रहेगी। इस दिन श्राद्ध, पितृ तर्पण और दान-पुण्य विशेष फलदायी माना जाता है। पूर्वजों की शांति और आशीर्वाद के लिए तिल, जल और दीपदान किया जाता है। पवित्र नदियों में स्नान करने तथा विष्णु व शिव पूजा करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में सुख-शांति स्थापित होती है।

विवाह पंचमी — 14 दिसंबर

विवाह पंचमी 14 दिसंबर, सोमवार को मनाई जाएगी। यह तिथि मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की पंचमी को आती है। पंचमी की शुरुआत 13 दिसंबर शाम 04:47 बजे से होकर 14 दिसंबर रात 07:15 बजे तक रहेगी। इस दिन माता सीता और श्रीराम के विवाह का पावन उत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। वैवाहिक जीवन में प्रेम, सामंजस्य और खुशियों की प्राप्ति के लिए यह दिन अत्यंत शुभ माना गया है। अविवाहित युवाओं के लिए अच्छे जीवनसाथी की कामना हेतु पूजा विशेष लाभ देती है।

स्कंद षष्ठी — 15 दिसंबर

स्कंद षष्ठी 15 दिसंबर, मंगलवार को मनाई जाएगी। यह व्रत मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को पड़ता है। षष्ठी तिथि 14 दिसंबर रात 07:15 बजे से शुरू होकर 15 दिसंबर रात 09:19 बजे तक रहेगी। यह व्रत भगवान कार्तिकेय यानी भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र को समर्पित है। इस दिन व्रत और पूजा करने से संकटों का नाश होता है और साहस व स्वास्थ्य की वृद्धि होती है। विशेषकर बच्चे के कल्याण और सुरक्षा के लिए यह तिथि अत्यंत शुभ मानी गई है।

धनु संक्रांति — 16 दिसंबर

धनु संक्रांति 16 दिसंबर, बुधवार को पड़ेगी। इसी दिन सूर्य देव राशि परिवर्तन कर धनु राशि में प्रवेश करेंगे। संक्रांति का शुभ समय 16 दिसंबर रात 10:45 बजे तक रहेगा। इस दिन स्नान, दान और पूजा का विशेष महत्व है। गाय, अन्न, वस्त्र और तिल दान करने से पुण्य की वृद्धि होती है। सूर्य देव की आराधना करने पर स्वास्थ्य लाभ और घर में समृद्धि आती है।

वैकुण्ठ एवं मोक्षदा एकादशी — 20 दिसंबर

वैकुण्ठ एकादशी जिसे मोक्षदा एकादशी भी कहा जाता है, 20 दिसंबर, रविवार को मनाई जाएगी। यह मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी है। एकादशी तिथि 19 दिसंबर रात 10:09 बजे से शुरू होकर 20 दिसंबर रात 08:14 बजे तक रहेगी। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा कर वैकुण्ठ द्वार खोलने का विशेष महत्व है। कहा जाता है कि इस व्रत से जीवन के सभी दुख दूर होते हैं और आत्मा को मुक्ति का मार्ग प्राप्त होता है। यह एकादशी पुण्य और मोक्ष प्रदान करने वालों में श्रेष्ठ मानी गई है।

प्रदोष व्रत — 21 दिसंबर

प्रदोष व्रत 21 दिसंबर, सोमवार को रखा जाएगा। यह व्रत मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी पर आता है। तिथि 21 दिसंबर शाम 05:36 बजे से लेकर 22 दिसंबर दोपहर 02:23 बजे तक रहेगी। संध्या काल में भगवान शिव की पूजा करने से इस व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है। यह व्रत कर्ज मुक्ति, स्वास्थ्य सुधार, दांपत्य सुख और जीवन में स्थिरता का वरदान देता है।

साल का सबसे छोटा दिन — 22 दिसंबर

साल का सबसे छोटा दिन 22 दिसंबर, मंगलवार को पड़ता है। यह घटना सूर्य के दक्षिणायन होने के कारण होती है, जब सूर्य पृथ्वी से सबसे दूर होता है। इस दिन दिन की अवधि कम और रात की अवधि अधिक होती है। पंचांग के अनुसार यह मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर रहेगा। तिथि 22 दिसंबर दोपहर 02:23 बजे से शुरू होकर 23 दिसंबर सुबह 10:47 बजे तक रहेगी। यह दिन ज्योतिषीय दृष्टि से ऊर्जा संचय और नई योजनाओं के प्रारंभ के लिए अच्छा माना जाता है।

मार्गशीर्ष पूर्णिमा — 23 दिसंबर

मार्गशीर्ष पूर्णिमा 23 दिसंबर, बुधवार को मनाई जाएगी। यह तिथि सुबह 10:47 बजे से प्रारंभ होकर 24 दिसंबर सुबह 06:57 बजे तक रहेगी। इस दिन भगवान नारायण की पूजा, गायत्री मंत्र का जाप और दान का विशेष महत्व है। यह दिन मनोकामना पूर्ति और शुभ फल प्रदान करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। गंगा स्नान और दीपदान करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है।

कालाष्टमी — 30 दिसंबर

कालाष्टमी 30 दिसंबर, बुधवार को मनाई जाएगी। यह पौष कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर पड़ती है। अष्टमी तिथि 30 दिसंबर दोपहर 12:36 बजे से शुरू होकर 31 दिसंबर दोपहर 12:32 बजे तक रहेगी। इस दिन काल भैरव जी की पूजा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस व्रत से भय, कष्ट और नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है। साधक को साहस, सुरक्षा और जीवन में स्थिरता प्राप्त होती है।

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