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जून 2026 त्योहार कैलेंडर: Festivals in June

Supriya Kandwal Supriya Kandwal Updated 2 Dec 2025

जून के त्योहार

त्योहारअंग्रेजी दिनवारमाहपक्ष / तिथितिथि आरंभतिथि समापन
विभुवन संकष्टी3 जूनबुधवारज्येष्ठकृष्ण – चतुर्थी09:21 PM, जून 311:30 PM, 4 जून
अधिक कालाष्टमी8 जूनसोमवारज्येष्ठकृष्ण पक्ष – अष्टमी03:24 AM, 8 जून03:23 AM, 9 जून
परम एकादशी11 जूनगुरुवारज्येष्ठकृष्ण पक्ष – एकादशी12:57 AM, 11 जून10:36 PM, 11 जून
प्रदोष व्रत12 जूनशुक्रवारज्येष्ठकृष्ण पक्ष – त्रयोदशी10:36 PM, 11 जून07:36 PM, 12 जून
मिथुन संक्रांति, ज्येष्ठ अधिक अमावस्या15 जूनसोमवारज्येष्ठकृष्ण पक्ष – अमावस्या12:19 PM, 14 जून08:23 AM, 15 जून
स्कंद षष्ठी19 जूनशुक्रवारज्येष्ठशुक्ल पक्ष – षष्ठी04:59 PM, 19 जून03:46 PM, 20 जून
साल का सबसे बड़ा दिन21 जूनरविवारज्येष्ठशुक्ल पक्ष – सप्तमी03:46 PM, 20 जून03:20 PM, 21 जून
गायत्री जयंती25 जूनगुरुवारज्येष्ठशुक्ल पक्ष – एकादशी06:12 PM, 24 जून08:09 PM, 25 जून
निर्जला एकादशी25 जूनगुरुवारज्येष्ठशुक्ल पक्ष – एकादशी06:12 PM, 24 जून08:09 PM, 25 जून
शनि त्रयोदशी27 जूनशनिवारज्येष्ठशुक्ल पक्ष – त्रयोदशी10:22 PM, 26 जून12:43 AM, 28 जून
प्रदोष व्रत27 जूनशनिवारज्येष्ठशुक्ल पक्ष – त्रयोदशी10:22 PM, 26 जून12:43 AM, 28 जून
वट पूर्णिमा व्रत, ज्येष्ठ पूर्णिमा29 जूनसोमवारज्येष्ठशुक्ल पक्ष – पूर्णिमा03:06 AM, 29 जून05:26 AM, 30 जून

हिन्दू कैलेंडर जून 2026 - व्रत एवं त्यौहार

विभुवन संकष्टी

3 जून 2026, बुधवार को विभुवन संकष्टी का व्रत रखा जाएगा। यह व्रत ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को आता है और भगवान गणेश की विशेष कृपा पाने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन उपवास रखकर और संध्या के समय गणेश जी की पूजा-अर्चना करके सभी विघ्नों और बाधाओं के निवारण की कामना की जाती है। चतुर्थी तिथि का आरंभ 3 जून को रात 09:21 बजे होगा और समाप्ति 4 जून को रात 11:30 बजे होगी। श्रद्धा और भक्ति के साथ व्रत करने से जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और मंगल की प्राप्ति होती है।

अधिक कालाष्टमी

8 जून 2026, सोमवार को अधिक कालाष्टमी का पावन पर्व मनाया जाएगा। यह पर्व ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आता है और भगवान भैरव की विशेष आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन भक्तजन व्रत रखते हैं और भगवान भैरव की पूजा-अर्चना कर जीवन में सुरक्षा, समृद्धि और सभी बाधाओं से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं। अष्टमी तिथि का आरंभ 8 जून को सुबह 03:24 बजे होगा और समाप्ति 9 जून को सुबह 03:23 बजे होगी। श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा करने से भगवान भैरव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में मंगल और कल्याण की वृद्धि होती है।

परम एकादशी

11 जून 2026, गुरुवार को परम एकादशी का व्रत रखा जाएगा। यह व्रत ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को आता है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन उपवास, पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन करने से पाप नष्ट होते हैं तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। एकादशी तिथि का आरंभ 11 जून को सुबह 12:57 बजे होगा और समाप्ति 11 जून को रात 10:36 बजे होगी। श्रद्धा और भक्ति के साथ व्रत करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होता है।

प्रदोष व्रत

12 जून 2026, शुक्रवार को प्रदोष व्रत रखा जाएगा। यह व्रत ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को पड़ता है और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन संध्या काल में शिवजी की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करने से जीवन में सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और मानसिक शांति प्राप्त होती है तथा सभी कष्ट दूर होते हैं। त्रयोदशी तिथि का आरंभ 11 जून को रात 10:36 बजे हुआ और समाप्ति 12 जून को शाम 07:36 बजे होगी। श्रद्धा और भक्ति के साथ व्रत-पूजन करने से भगवान शिव की कृपा और आशीर्वाद मिलता है।

मिथुन संक्रांति और ज्येष्ठ अधिक अमावस्या

15 जून 2026, सोमवार को मिथुन संक्रांति और ज्येष्ठ अधिक अमावस्या का पावन संयोग बन रहा है। यह दिन ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को आता है और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है। मिथुन संक्रांति पर सूर्य देव का मिथुन राशि में प्रवेश होता है, जो जीवन में नई ऊर्जा, नई शुरुआत और समृद्धि का प्रतीक है। इस दिन अमावस्या के अवसर पर पितृ तर्पण, गंगा स्नान और दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है। अमावस्या तिथि का आरंभ 14 जून को दोपहर 12:19 बजे हुआ और समाप्ति 15 जून को सुबह 08:23 बजे होगी। इस दिन किए गए व्रत, पूजा और दान से पितरों का आशीर्वाद, जीवन में शांति और समृद्धि प्राप्त होती है।

स्कंद षष्ठी

19 जून 2026, शुक्रवार को स्कंद षष्ठी का पावन पर्व मनाया जाएगा। यह पर्व ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को आता है और भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की विशेष पूजा-अर्चना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन उपवास और भजन-कीर्तन करके भगवान स्कंद की आराधना की जाती है, जिससे जीवन में साहस, स्वास्थ्य और सभी बाधाओं से मुक्ति प्राप्त होती है। षष्ठी तिथि का आरंभ 19 जून को शाम 04:59 बजे होगा और समाप्ति 20 जून को शाम 03:46 बजे होगी। श्रद्धा और भक्ति के साथ इस दिन पूजा करने से भगवान स्कंद की विशेष कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होता है।

साल का सबसे बड़ा दिन

21 जून 2026, रविवार को साल का सबसे बड़ा दिन यानी ग्रीष्म संक्रांति पड़ रहा है। यह दिन ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को आता है और सूर्य की ध्रुवीय स्थिति के कारण दिन का समय सबसे लंबा होता है। इसे धार्मिक दृष्टि से भी शुभ माना जाता है और इस अवसर पर सूर्य देव की पूजा, दान और व्रत का विशेष महत्व है। सप्तमी तिथि का आरंभ 20 जून को शाम 03:46 बजे हुआ और समाप्ति 21 जून को शाम 03:20 बजे होगी। इस दिन सूर्य की उपासना और धार्मिक क्रियाएँ करने से जीवन में स्वास्थ्य, ऊर्जा, समृद्धि और उज्जवल भविष्य की प्राप्ति होती है।

गायत्री जयंती

25 जून 2026, गुरुवार को गायत्री जयंती का पावन पर्व मनाया जाएगा। यह दिन ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पड़ता है और माता गायत्री के जन्मोत्सव के रूप में अत्यंत शुभ माना जाता है। इस अवसर पर भक्तजन गायत्री मंत्र का जाप, पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन करते हैं, जिससे ज्ञान, शांति और समृद्धि प्राप्त होती है। एकादशी तिथि का आरंभ 24 जून को शाम 06:12 बजे होगा और समाप्ति 25 जून को शाम 08:09 बजे होगी। श्रद्धा और भक्ति के साथ इस दिन किए गए व्रत और पूजा से जीवन में आध्यात्मिक उन्नति और मंगल की प्राप्ति होती है।

निर्जला एकादशी

25 जून 2026, गुरुवार को निर्जला एकादशी का पावन व्रत रखा जाएगा। यह व्रत ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को आता है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्ति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन निर्जला उपवास रखा जाता है, यानी पूरे दिन जल का सेवन किए बिना व्रत रखा जाता है, जिससे पापों का नाश होता है और जीवन में सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त होती है। एकादशी तिथि का आरंभ 24 जून को शाम 06:12 बजे होगा और समाप्ति 25 जून को शाम 08:09 बजे होगी। श्रद्धा और भक्ति के साथ व्रत करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होता है।

शनि त्रयोदशी

27 जून 2026, शनिवार को शनि त्रयोदशी का व्रत मनाया जाएगा। यह व्रत ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को आता है और शनि देव की विशेष कृपा प्राप्ति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु शनि देव की पूजा और दान करते हैं, जिससे शनि दोष निवारण होता है और जीवन में सुख-शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है। त्रयोदशी तिथि का आरंभ 26 जून को रात 10:22 बजे हुआ और समाप्ति 28 जून को सुबह 12:43 बजे होगी। श्रद्धा और भक्ति के साथ इस व्रत और पूजा करने से शनि देव की विशेष कृपा प्राप्त होती है और सभी बाधाएँ दूर होती हैं।

वट पूर्णिमा व्रत

29 जून 2026, सोमवार को वट पूर्णिमा व्रत का पावन पर्व मनाया जाएगा। यह व्रत ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को पड़ता है और विशेष रूप से महिलाओं द्वारा पति की लंबी आयु और परिवार की खुशहाली के लिए किया जाता है। इस दिन वटवृक्ष के नीचे पूजा-अर्चना, उपवास और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है। पूर्णिमा तिथि का आरंभ 29 जून को सुबह 03:06 बजे होगा और समाप्ति 30 जून को सुबह 05:26 बजे होगी। श्रद्धा और भक्ति के साथ वट पूर्णिमा व्रत रखने से जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और वैवाहिक सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

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