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जनवरी 2026 त्योहार कैलेंडर: Festivals in January

Supriya Kandwal Supriya Kandwal Updated 2 Dec 2025

जनवरी के त्योहार

त्योहारअंग्रेजी दिनवारमाहपक्ष/तिथितिथि आरंभतिथि समापन
गुरु प्रदोष व्रत1 जनवरीगुरुवारपौषशुक्ल-त्रयोदशी1 जनवरी, 1:47 ए एम1 जनवरी, 10:22 पी एम
पौष पूर्णिमा3 जनवरीशनिवारपौषशुक्ल-पूर्णिमा2 जनवरी, 6:53 पी एम3 जनवरी, 3:32 पी एम
संकष्टी चतुर्थी6 जनवरीमंगलवारमाघकृष्ण-चतुर्थी6 जनवरी, 8:01 ए एम7 जनवरी, 6:52 ए एम
कालाष्टमी10 जनवरीशनिवारमाघकृष्ण-अष्टमी10 जनवरी, 8:23 ए एम11 जनवरी, 10:20 ए एम
लोहड़ी13 जनवरीमंगलवारमाघकृष्ण-दशमी12 जनवरी, 12:42 पी एम13 जनवरी, 3:17 पी एम
मकर संक्रांति/पोंगल14 जनवरीबुधवारमाघकृष्ण-एकादशी13 जनवरी, 3:17 पी एम14 जनवरी, 5:52 पी एम
प्रदोष व्रत/मासिक शिवरात्रि16 जनवरीशुक्रवारमाघकृष्ण-त्रयोदशी16 जनवरी, 8:16 पी एम16 जनवरी, 10:21 पी एम
मौनी अमावस्या18 जनवरीरविवारमाघकृष्ण-अमावस्या18 जनवरी, 12:03 ए एम19 जनवरी, 1:21 ए एम
वसंत पंचमी23 जनवरीशुक्रवारफाल्गुनशुक्ल-पंचमी23 जनवरी, 2:28 ए एम24 जनवरी, 1:46 ए एम
स्कंद षष्ठी24 जनवरीशनिवारफाल्गुनशुक्ल-षष्ठी24 जनवरी, 1:46 ए एम25 जनवरी, 12:39 ए एम
गणतंत्र दिवस/दुर्गाष्टमी26 जनवरीसोमवारफाल्गुनशुक्ल-अष्टमी25 जनवरी, 11:10 पी एम26 जनवरी, 9:17 पी एम
जया एकादशी29 जनवरीगुरुवारफाल्गुनशुक्ल-एकादशी28 जनवरी, 4:35 पी एम29 जनवरी, 1:55 पी एम
प्रदोष व्रत30 जनवरीशुक्रवारफाल्गुनशुक्ल-त्रयोदशी29 जनवरी, 1:55 पी एम30 जनवरी, 11:09 ए एम

हिन्दू कैलेंडर जनवरी 2026 - व्रत एवं त्यौहार

प्रदोष व्रत

प्रदोष व्रत भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए मनाए जाने वाले अत्यंत शुभ पर्व हैं। इस दिन शिवजी और माता पार्वती की पूजा करने से सभी कष्ट दूर होते हैं और मनोकामना पूर्ण होती है। प्रदोष व्रत प्रत्येक माह की शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को आता है। जनवरी माह में प्रदोष व्रत 1 जनवरी, 16 जनवरी और 30 जनवरी को मनाया जाएगा।

पौष पूर्णिमा

पौष माह के शुल्क पक्ष में आने वाली पूर्णिमा बेहद ही फलदायी मानी जाती है। इस दिन किया गया दान- पुण्य और गंगा स्नान का विशेष महत्व होता है। साल 2026 में पौष पूर्णिमा का प्रारंभ 2 जनवरी को सायं 6 बजकर 53 मिनट पर हो रहा है और वहीं इस तिथि का समापन 3 जनवरी को दोपहर 3 बजकर 32 मिनट पर होगा।

संकष्ठी चतुर्थी

संकष्ठी चतुर्थी भगवान श्री गणेश को समर्पित मंगलकारी व्रत है। माना जाता है कि इस दिन की गई पूजा से जीवन में आने वाले सभी विघ्न दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। जनवरी 2026 में संकष्टी चतुर्थी का पर्व 6 जनवरी, मंगलवार को मनाया जाएगा और यह व्रत माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को पड़ रहा है। इस तिथि का प्रारंभ 6 जनवरी को प्रातः 8 बजकर 01 मिनट पर होगा और समापन 7 जनवरी को प्रातः 6 बजकर 52 मिनट पर होगा।

कालाष्टमी

कालाष्टमी भगवान काल भैरव को समर्पित एक अत्यंत महत्वपूर्ण तिथि है। इस दिन श्रद्धा और भक्ति भाव से काल भैरव की पूजा करने पर जीवन में आने वाली बाधाएं, भय और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं तथा सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। जनवरी 2026 में कालाष्टमी का पर्व 10 जनवरी, शनिवार को मनाया जाएगा। यह व्रत माघ मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को पड़ेगा। अष्टमी तिथि का प्रारंभ 10 जनवरी को प्रातः 08 बजकर 23 मिनट पर होगा और इसका समापन 11 जनवरी को प्रातः 10 बजकर 20 मिनट पर होगा।

लोहड़ी

लोहड़ी उत्तर भारत का एक प्रमुख लोक पर्व है जो खुशी, उत्साह और भाईचारे का प्रतीक माना जाता है। इस त्यौहार पर अग्नि देव की पूजा की जाती है और नए मौसम, फसल तथा समृद्धि का स्वागत किया जाता है। वर्ष 2026 में लोहड़ी का पर्व 13 जनवरी, मंगलवार को मनाया जाएगा। यह माघ मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को पड़ेगा। इस दिन परिवार और मित्रजन एक साथ मिलकर अग्नि के चारों ओर नृत्य-गीत करते हैं, तिल, मूंगफली और गज्जक का भोग लगाया जाता है और आने वाले वर्ष की खुशहाली की कामना की जाती है।

मकर संक्रांति, पोंगल, उत्तरायण और षटतिला एकादशी

यह सभी अत्यंत शुभ और पवित्र पर्व एक ही दिन मनाए जाते हैं। इस दिन सूर्य देव धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे उत्तरायण की शुरुआत माना जाता है। वर्ष 2026 में यह पावन अवसर 14 जनवरी, बुधवार को पड़ेगा। यह माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाएगा। एकादशी तिथि का प्रारंभ 13 जनवरी को दोपहर 3 बजकर 17 मिनट पर होगा और समापन 14 जनवरी को शाम 5 बजकर 52 मिनट पर। मकर संक्रांति और उत्तरायण के दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व है, जबकि दक्षिण भारत में पोंगल का पर्व नए फसल उत्सव के रूप में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इसी दिन आने वाली षटतिला एकादशी पर तिल का दान तथा भजन-कीर्तन करने से अपार पुण्य की प्राप्ति होती है और घर में सुख-समृद्धि का वास बना रहता है।

मौनी अमावस्या

मौनी अमावस्या माघ मास की एक अत्यंत पवित्र तिथि है, जिसे मौन रहकर साधना और गंगा स्नान के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इस दिन मन, वचन और कर्म को पवित्र रखते हुए जाप और ध्यान करने से अपार पुण्य की प्राप्ति होती है। वर्ष 2026 में मौनी अमावस्या का पावन पर्व 18 जनवरी, रविवार को मनाया जाएगा। यह माघ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को पड़ेगा। अमावस्या तिथि 18 जनवरी को रात्रि 12 बजकर 03 मिनट पर प्रारंभ होकर 19 जनवरी को रात्रि 01 बजकर 21 मिनट पर समाप्त होगी।

वसंत पंचमी

वसंत पंचमी ज्ञान, विद्या और संगीत की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती की उपासना का पावन पर्व है। इस दिन से ऋतु परिवर्तन के साथ वसंत का आगमन माना जाता है और प्रकृति अपनी सुंदरता का नया स्वरूप धारण करती है। वर्ष 2026 में वसंत पंचमी का उत्सव 23 जनवरी, शुक्रवार को मनाया जाएगा। यह फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को पड़ेगा। पंचमी तिथि 23 जनवरी को प्रातः 2 बजकर 28 मिनट पर प्रारंभ होकर 24 जनवरी को रात्रि 1 बजकर 46 मिनट पर समाप्त होगी। इस दिन विद्यार्थी और कलाकार विशेष रूप से माँ सरस्वती की आराधना करते हैं तथा पीले वस्त्र धारण कर पीले व्यंजन का सेवन शुभ माना जाता है।

स्कंद षष्ठी

स्कंद षष्ठी भगवान कार्तिकेय, जिन्हें स्कंद, मुरुगन और कुमारस्वामी के नाम से भी जाना जाता है, की उपासना का महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन भक्तजन साहस, विजय, स्वास्थ्य और संतानों की सुख-समृद्धि की कामना से व्रत और पूजा करते हैं। वर्ष 2026 में स्कंद षष्ठी 24 जनवरी, शनिवार को मनाई जाएगी। यह फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को पड़ेगी। षष्ठी तिथि 24 जनवरी को रात्रि 1 बजकर 46 मिनट पर शुरू होकर 25 जनवरी को रात्रि 12 बजकर 39 मिनट पर समाप्त होगी। इस दिन भगवान कार्तिकेय की पूजा, विशेष मंत्रों का जाप और मंदिरों में दर्शन का अत्यंत शुभ फल मिलता है। शिव परिवार के इस वीर और तेजस्वी देव की कृपा से जीवन में शक्ति, पराक्रम और सफलता की प्राप्ति होती है।

गणतंत्र दिवस

26 जनवरी भारत में गणतंत्र दिवस के रूप में गर्व के साथ मनाया जाता है। इस दिन भारत का संविधान लागू हुआ था, इसलिए देशभर में ध्वजारोहण, परेड और राष्ट्रीय उत्सवों का आयोजन किया जाता है। इसी दिन मासिक दुर्गाष्टमी भी मनाई जाएगी, जो माता दुर्गा को समर्पित एक महत्वपूर्ण तिथि है। वर्ष 2026 में यह पर्व 26 जनवरी, सोमवार को पड़ेगा। यह फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाएगा। अष्टमी तिथि का प्रारंभ 25 जनवरी को रात 11 बजकर 10 मिनट पर होगा और 26 जनवरी को रात 9 बजकर 17 मिनट तक रहेगी। इस दिन माता दुर्गा की पूजा, उपवास और मंत्र-जप करने से जीवन में शक्ति, संरक्षण तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, वहीं गणतंत्र दिवस के राष्ट्रीय उत्साह से नागरिकों में देशप्रेम की भावना और अधिक प्रबल होती है।

जया एकादशी

जया एकादशी भगवान विष्णु की आराधना का अत्यंत पुण्यकारी व्रत है। इस दिन उपवास, भजन-कीर्तन और श्रीहरि के नाम का स्मरण करने से पापों का नाश होता है तथा जीवन में सुख-समृद्धि और शांति की प्राप्ति होती है। वर्ष 2026 में जया एकादशी का व्रत 29 जनवरी, गुरुवार को मनाया जाएगा। यह फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पड़ेगा। एकादशी तिथि 28 जनवरी को सायं 4 बजकर 35 मिनट से प्रारंभ होकर 29 जनवरी को दोपहर 1 बजकर 55 मिनट तक रहेगी। धार्मिक मान्यता है कि जया एकादशी के प्रभाव से न केवल वर्तमान जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं, बल्कि पूर्व जन्मों के दोष भी समाप्त हो जाते हैं। इस पावन व्रत से भक्तों को मोक्ष का मार्ग और दिव्य कृपा प्राप्त होती है।

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