जुलाई 2026 त्योहार कैलेंडर: Festivals in July
जुलाई के त्योहार
| त्योहार | अंग्रेजी दिन | वार | माह | पक्ष / तिथि | तिथि आरंभ | तिथि समापन |
|---|---|---|---|---|---|---|
| संकष्टी चतुर्थी | 3 जुलाई | शुक्रवार | आषाढ़ | कृष्ण पक्ष – चतुर्थी | 11:20 AM, 3 जुलाई | 12:39 PM, 4 जुलाई |
| कालाष्टमी | 7 जुलाई | मंगलवार | आषाढ़ | कृष्ण पक्ष – अष्टमी | 01:24 PM, 7 जुलाई | 12:21 PM, 8 जुलाई |
| योगिनी एकादशी | 10 जुलाई | शुक्रवार | आषाढ़ | कृष्ण पक्ष – एकादशी | 08:16 AM, 10 जुलाई | 05:22 AM, 11 जुलाई |
| प्रदोष व्रत, मासिक शिवरात्रि | 12 जुलाई | रविवार | आषाढ़ | कृष्ण पक्ष – त्रयोदशी | 02:04 AM, 12 जुलाई | 10:29 PM, 12 जुलाई |
| दर्श अमावस्या, आषाढ़ अमावस्या | 14 जुलाई | मंगलवार | आषाढ़ | कृष्ण पक्ष – अमावस्या | 06:49 PM, 13 जुलाई | 03:12 PM, 14 जुलाई |
| जगन्नाथ यात्रा प्रारंभ, कर्क संक्रांति | 16 जुलाई | गुरुवार | आषाढ़ | शुक्ल पक्ष – द्वितीया | 11:50 AM, 15 जुलाई | 08:52 AM, 16 जुलाई |
| अनिरुद्ध चतुर्थी | 17 जुलाई | शुक्रवार | आषाढ़ | शुक्ल पक्ष – चतुर्थी | 06:27 AM, 17 जुलाई | 04:42 AM, 18 जुलाई |
| स्कंद षष्ठी | 19 जुलाई | रविवार | आषाढ़ | शुक्ल पक्ष – षष्ठी | 03:42 AM, 19 जुलाई | 03:29 AM, 20 जुलाई |
| देवशयनी एकादशी | 25 जुलाई | शनिवार | आषाढ़ | शुक्ल पक्ष – एकादशी | 09:12 AM, 24 जुलाई | 11:34 AM, 25 जुलाई |
| प्रदोष व्रत | 26 जुलाई | रविवार | आषाढ़ | शुक्ल पक्ष – चतुर्दशी | 01:57 PM, 26 जुलाई | 04:14 PM, 27 जुलाई |
| गुरु पूर्णिमा, आषाढ़ पूर्णिमा | 29 जुलाई | बुधवार | आषाढ़ | शुक्ल पक्ष – पूर्णिमा | 06:18 PM, 28 जुलाई | 08:05 PM, 29 जुलाई |
हिन्दू कैलेंडर जुलाई 2026 - व्रत एवं त्यौहार
संकष्टी चतुर्थी
3 जुलाई 2026, शुक्रवार को संकष्टी चतुर्थी का पावन व्रत मनाया जाएगा। यह व्रत आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को पड़ता है और भगवान गणेश की विशेष कृपा प्राप्ति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन उपवास रखकर और संध्या के समय गणेश जी की पूजा-अर्चना करके सभी विघ्नों और बाधाओं के निवारण की कामना की जाती है। चतुर्थी तिथि का आरंभ 3 जुलाई को सुबह 11:20 बजे होगा और समाप्ति 4 जुलाई को दोपहर 12:39 बजे होगी। श्रद्धा और भक्ति के साथ व्रत करने से जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और मंगल की प्राप्ति होती है।
कालाष्टमी
7 जुलाई 2026, मंगलवार को कालाष्टमी का पावन पर्व मनाया जाएगा। यह पर्व आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आता है और भगवान भैरव की विशेष आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन भक्तजन व्रत रखते हैं और भगवान भैरव की पूजा-अर्चना कर जीवन में सुरक्षा, समृद्धि और सभी बाधाओं से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं। अष्टमी तिथि का आरंभ 7 जुलाई को दोपहर 01:24 बजे होगा और समाप्ति 8 जुलाई को दोपहर 12:21 बजे होगी। श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा करने से भगवान भैरव की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होता है।
योगिनी एकादशी
10 जुलाई 2026, शुक्रवार को योगिनी एकादशी का पावन व्रत रखा जाएगा। यह व्रत आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को पड़ता है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन उपवास और पूजा-अर्चना करने से पाप नष्ट होते हैं तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। एकादशी तिथि का आरंभ 10 जुलाई को सुबह 08:16 बजे होगा और समाप्ति 11 जुलाई को सुबह 05:22 बजे होगी। श्रद्धा और भक्ति के साथ व्रत करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होता है।
प्रदोष व्रत और मासिक शिवरात्रि
12 जुलाई 2026, रविवार को प्रदोष व्रत और मासिक शिवरात्रि का पावन पर्व मनाया जाएगा। यह व्रत आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को आता है और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन संध्या काल में शिवजी की पूजा-अर्चना करने से जीवन में सुख-शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि प्राप्त होती है तथा सभी बाधाएँ दूर होती हैं। त्रयोदशी तिथि का आरंभ 12 जुलाई को सुबह 02:04 बजे होगा और समाप्ति 12 जुलाई को रात 10:29 बजे होगी। श्रद्धा और भक्ति के साथ व्रत-पूजन करने से भगवान शिव की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होता है।
दर्श अमावस्या
14 जुलाई 2026, मंगलवार को दर्श अमावस्या यानी आषाढ़ अमावस्या का पावन दिन है। यह अमावस्या आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को पड़ती है और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ मानी जाती है। इस दिन पितृ तर्पण, दान-पुण्य और गंगा स्नान का विशेष महत्व है। अमावस्या तिथि का आरंभ 13 जुलाई को शाम 06:49 बजे हुआ और समाप्ति 14 जुलाई को दोपहर 03:12 बजे होगी। इस दिन किए गए व्रत, दान और पूजा से पितरों की प्रसन्नता और जीवन में शांति, स्वास्थ्य एवं समृद्धि की प्राप्ति होती है।
जगन्नाथ यात्रा, कर्क संक्रांति
16 जुलाई 2026, गुरुवार को जगन्नाथ यात्रा का प्रारंभ और कर्क संक्रांति का पावन दिन है। यह पर्व आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को पड़ता है और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है। कर्क संक्रांति पर सूर्य देव कर्क राशि में प्रवेश करते हैं, जो जीवन में ऊर्जा, उत्साह और नई शुरुआत का प्रतीक है। इस अवसर पर जगन्नाथ जी की यात्रा का शुभारंभ होता है, जिसमें भक्तजन रथयात्रा और पूजा-अर्चना करके विशेष पुण्य प्राप्त करते हैं। द्वितीया तिथि का आरंभ 15 जुलाई को सुबह 11:50 बजे हुआ और समाप्ति 16 जुलाई को सुबह 08:52 बजे होगी। इस दिन किए गए दान, पूजा और यात्रा में सम्मिलित होने से जीवन में सुख, समृद्धि और मंगल की प्राप्ति होती है।
अनिरुद्ध चतुर्थी
17 जुलाई 2026, शुक्रवार को अनिरुद्ध चतुर्थी का पावन व्रत मनाया जाएगा। यह व्रत आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को आता है और भगवान गणेश की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन उपवास रखकर और संध्या के समय गणेश जी की पूजा-अर्चना करके सभी विघ्नों और बाधाओं के निवारण की कामना की जाती है। चतुर्थी तिथि का आरंभ 17 जुलाई को सुबह 06:27 बजे होगा और समाप्ति 18 जुलाई को सुबह 04:42 बजे होगी। श्रद्धा और भक्ति के साथ व्रत करने से जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और मंगल की प्राप्ति होती है।
स्कंद षष्ठी
19 जुलाई 2026, रविवार को स्कंद षष्ठी का पावन पर्व मनाया जाएगा। यह पर्व आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को आता है और भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की विशेष पूजा-अर्चना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन उपवास और भजन-कीर्तन करके भगवान स्कंद की आराधना की जाती है, जिससे जीवन में साहस, स्वास्थ्य और सभी बाधाओं से मुक्ति प्राप्त होती है। षष्ठी तिथि का आरंभ 19 जुलाई को सुबह 03:42 बजे होगा और समाप्ति 20 जुलाई को सुबह 03:29 बजे होगी। श्रद्धा और भक्ति के साथ इस दिन पूजा करने से भगवान स्कंद की विशेष कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होता है।
देवशयनी एकादशी
25 जुलाई 2026, शनिवार को देवशयनी एकादशी का पावन व्रत मनाया जाएगा। यह व्रत आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को आता है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन उपवास, पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन करने से पाप नष्ट होते हैं तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। एकादशी तिथि का आरंभ 24 जुलाई को सुबह 09:12 बजे हुआ और समाप्ति 25 जुलाई को सुबह 11:34 बजे होगी। श्रद्धा और भक्ति के साथ व्रत करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होता है।
प्रदोष व्रत
26 जुलाई 2026, रविवार को प्रदोष व्रत रखा जाएगा। यह व्रत आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को पड़ता है और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन संध्या काल में शिवजी की पूजा-अर्चना करने से जीवन में सुख-शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि प्राप्त होती है तथा सभी बाधाएँ दूर होती हैं। चतुर्दशी तिथि का आरंभ 26 जुलाई को दोपहर 01:57 बजे होगा और समाप्ति 27 जुलाई को शाम 04:14 बजे होगी। श्रद्धा और भक्ति के साथ व्रत-पूजन करने से भगवान शिव की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होता है।
गुरु पूर्णिमा और आषाढ़ पूर्णिमा
29 जुलाई 2026, बुधवार को गुरु पूर्णिमा और आषाढ़ पूर्णिमा का पावन पर्व मनाया जाएगा। यह दिन आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को पड़ता है और गुरुजनों एवं आचार्यों की पूजा-अर्चना करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस अवसर पर श्रद्धालु गुरु वंदना, ध्यान, पूजा और दान करते हैं, जिससे ज्ञान, भक्ति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। पूर्णिमा तिथि का आरंभ 28 जुलाई को शाम 06:18 बजे हुआ और समाप्ति 29 जुलाई को शाम 08:05 बजे होगी। इस दिन गुरु और देवताओं की भक्ति से जीवन में सुख, समृद्धि और मंगल की प्राप्ति होती है।
सावन माह प्रारंभ
30 जुलाई 2026, गुरुवार से सावन माह का प्रारंभ हो रहा है। यह माह श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होता है और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस अवसर पर भक्तजन उपवास, पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और शिवलिंग पर जलाभिषेक करके अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। प्रतिपदा तिथि का आरंभ 29 जुलाई को शाम 08:05 बजे हुआ और समाप्ति 30 जुलाई को शाम 09:30 बजे होगी। सावन माह में किए गए व्रत और पूजा का पुण्य अत्यधिक माना जाता है।

