Logo
MarchMarch

मार्च 2026 त्योहार कैलेंडर: Festivals in March

Supriya Kandwal Supriya Kandwal Updated 2 Dec 2025

मार्च के त्योहार

त्योहारअंग्रेजी दिनवारमाहपक्ष/तिथितिथि आरंभतिथि समापन
प्रदोष व्रत1 मार्चरविवारफाल्गुनशुक्ल पक्ष – त्रयोदशी08:43 पी एम, 28 फरवरी07:09 पी एम, 1 मार्च
छोटी होली, होलिका दहन, फाल्गुन पूर्णिमा, चंद्र ग्रहण3 मार्चमंगलवारफाल्गुनशुक्ल पक्ष – पूर्णिमा05:55 पी एम, 2 मार्च05:07 पी एम, 3 मार्च
होली4 मार्चबुधवारचैत्रकृष्ण पक्ष – प्रतिपदा05:07 पी एम, 3 मार्च04:48 पी एम, 4 मार्च
भाल चंद्र संकष्टी6 मार्चशुक्रवारचैत्रकृष्ण पक्ष – चतुर्थी05:53 पी एम07:17 पी एम
रंग पंचमी8 मार्चरविवारचैत्रकृष्ण पक्ष – पंचमी07:17 पी एम, 7 मार्च09:10 पी एम, 8 मार्च
शीतला अष्टमी, बसौड़ा, कालाष्टमी11 मार्चबुधवारचैत्रकृष्ण पक्ष – अष्टमी01:54 ए एम, 11 मार्च04:19 ए एम, 12 मार्च
मीन संक्रांति, पापमोचनी एकादशी, प्रदोष व्रत15 मार्चरविवारचैत्रकृष्ण पक्ष – एकादशी08:10 ए एम, 14 मार्च09:16 ए एम, 15 मार्च
युगादि, गुड़ी पड़वा, चैत्र नवरात्र, चैत्र अमावस्या19 मार्चगुरुवारचैत्रकृष्ण पक्ष – अमावस्या08:25 ए एम, 18 मार्च06:52 ए एम, 19 मार्च
गणगौर21 मार्चशनिवारचैत्रशुक्ल पक्ष – तृतीया02:30 ए एम, 21 मार्च11:56 पी एम, 21 मार्च
स्कंद षष्ठी24 मार्चमंगलवारचैत्रशुक्ल पक्ष – पंचमी06:38 पी एम, 23 मार्च04:07 पी एम, 24 मार्च
राम नवमी26–27 मार्चगुरुवार–शुक्रवारचैत्रशुक्ल पक्ष – नवमी11:48 ए एम, 26 मार्च10:06 ए एम, 27 मार्च
कामदा एकादशी29 मार्चरविवारचैत्रशुक्ल पक्ष – एकादशी08:45 ए एम, 28 मार्च07:46 ए एम, 29 मार्च
प्रदोष व्रत30 मार्चसोमवारचैत्रशुक्ल पक्ष – त्रयोदशी07:46 ए एम, 29 मार्च07:09 ए एम, 30 मार्च

हिन्दू कैलेंडर मार्च 2026 - व्रत एवं त्यौहार

प्रदोष व्रत

प्रदोष व्रत का विशेष महत्व भगवान शिव की उपासना के लिए माना जाता है। यह व्रत 1 मार्च 2026, रविवार को रखा जाएगा। यह व्रत फ़ाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को पड़ता है। इस दिन भक्तजन प्रदोष काल में शिवजी की पूजा-अर्चना करते हैं, जिससे जीवन में सुख, समृद्धि और कल्याण की प्राप्ति होती है। पंचांग के अनुसार त्रयोदशी तिथि 28 फरवरी की रात 08:43 बजे से प्रारंभ होकर 1 मार्च की शाम 07:09 बजे तक रहेगी। इस व्रत को विशेष रूप से शाम के समय मनाया जाता है, जो भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना गया है।

छोटी होली और होलिका दहन

3 मार्च 2026, मंगलवार को पूरे उल्लास और भक्तिभाव के साथ एक महत्त्वपूर्ण पावन दिन स्वीकार किया जाएगा जिसमें कई पर्व एक साथ समाहित हैं—सबसे पहले यह दिन है छोटी होली और होलिका दहन का, जहां बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक अग्नि प्रज्ज्वलित की जाती है। साथ ही यह दिन मनाया जाएगा वसंत पंचमी का, जो विद्या, कला और वसंत ऋतु के आगमन का पर्व है। इसके अतिरिक्त यह समय है फाल्गुन पूर्णिमा का, जब मासिक पूर्णिमा तिथि से जुड़ी पूजा, जप और दान का विशेष महत्व माना जाता है। और खास बात यह कि इस दिन होगा चंद्र ग्रहण, जो इसे और भी ऊँचा आध्यात्मिक अवसर बनाता है। इस पावन तिथि का प्रारंभ 2 मार्च को सायं 5 बजकर 55 मिनट पर होगा और समापन 3 मार्च को सायं 5 बजकर 7 मिनट पर होगा। इस दिन लोग रंग-रंजित होली का आनंद लेने के साथ-साथ गंगा स्नान, दान-पुण्य और भक्ति-उपवास करते हैं, जिससे जीवन में उल्लास, शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग खुलता है।

होली

4 मार्च 2026, बुधवार को रंगों का सबसे बड़ा और उल्लासपूर्ण पर्व होली पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाएगा। यह दिन चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर पड़ता है। इस शुभ तिथि का आरंभ 3 मार्च को शाम 05:07 बजे होगा और इसका समापन 4 मार्च को शाम 04:48 बजे होगा। होली के इस पावन अवसर पर लोग सभी ग़लतफ़हमियों और कड़वाहटों को भूलकर प्रेम, भाईचारे और खुशियों के रंग में एक-दूसरे को रंगते हैं। घर-परिवार और समाज में उल्लास, उमंग और मेल-मिलाप का यह अनोखा त्योहार बुराई और नफ़रत से दूर रहकर रिश्तों को और अधिक प्रगाढ़ बनाने का संदेश देता है।

भाल चंद्र संकष्टी चतुर्थी

6 मार्च 2026, शुक्रवार को भाल चंद्र संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा। यह व्रत चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को पड़ता है। इस दिन भगवान श्री गणेश के भाल चंद्र रूप की पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा और विधि-विधान से करने पर सभी बाधाएँ दूर होती हैं और मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। इस पावन तिथि का आरंभ 6 मार्च को शाम 05:53 बजे होगा और समापन 7 मार्च को शाम 07:17 बजे होगा। संध्या के समय चंद्र दर्शन और गणेश जी का विशेष पूजन इस व्रत का मुख्य नियम माना जाता है।

रंग पंचमी

8 मार्च 2026, रविवार को रंग पंचमी का उत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। यह पर्व चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को आता है और होली के बाद रंगों से खेलने का विशेष दिन माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन रंगों का उत्सव भगवान कृष्ण और राधा के प्रेम का प्रतीक है तथा नकारात्मक ऊर्जाओं पर सकारात्मकता के रंगों की विजय होती है। पंचमी तिथि का आरंभ 7 मार्च को शाम 07:17 बजे होगा और तिथि का समापन 8 मार्च को रात 09:10 बजे तक रहेगा। इस दिन लोग रंग-गुलाल के साथ मिलजुलकर खुशियाँ मनाते हैं और एक-दूसरे को शुभकामनाएँ देते हैं।

बसौड़ा पर्व और कालाष्टमी

11 मार्च 2026, बुधवार को शीतला अष्टमी, बसौड़ा पर्व और कालाष्टमी का विशेष योग बन रहा है। यह पर्व चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। शीतला अष्टमी पर माता शीतला की पूजा का विशेष महत्व है, जिसमें ठंडे भोजन का भोग लगाया जाता है और परिवार की सेहत एवं रोग-निवारण की कामना की जाती है। वहीं कालाष्टमी के दिन भक्त भगवान भैरव की उपासना कर सुरक्षा और न्याय की कामना करते हैं। इस तिथि की शुरुआत 11 मार्च को रात 01:54 बजे होगी और समाप्ति 12 मार्च को सुबह 04:19 बजे होगी। इस दिन नियम, संयम और श्रद्धा के साथ पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

पापमोचनी एकादशी और प्रदोष व्रत

15 मार्च 2026, रविवार को मीन संक्रांति, पापमोचनी एकादशी और प्रदोष व्रत का शुभ संयोग बन रहा है। यह तिथि चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को पड़ती है। पापमोचनी एकादशी के दिन व्रत करने से सभी प्रकार के पापों का नाश होता है और जीवन में शुभता आती है। इसी दिन सूर्य देव मीन राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे मीन संक्रांति कहा जाता है और इस संक्रांति पर दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है। साथ ही प्रदोष व्रत भगवान शिव की प्रसन्नता के लिए रखा जाता है, जो भक्तों को कल्याण और शांति प्रदान करता है। एकादशी तिथि का आरंभ 14 मार्च को सुबह 08:10 बजे होगा और समापन 15 मार्च को सुबह 09:16 बजे होगा। श्रद्धा और भक्ति के साथ इस दिन व्रत-पूजन करने से विशेष फल प्राप्त होता है।

गुड़ी पड़वा, चैत्र नवरात्र

19 मार्च 2026, गुरुवार को युगादि, गुड़ी पड़वा, चैत्र नवरात्र और चैत्र अमावस्या का अत्यंत शुभ संयोग बन रहा है। यह दिन चैत्र मास की अमावस्या तिथि को पड़ता है और हिन्दू नववर्ष के आरंभ का प्रतीक माना जाता है। युगादि और गुड़ी पड़वा नए आरंभ, नए संकल्प और समृद्धि के पर्व हैं। इसी दिन से चैत्र नवरात्र की शुरुआत होती है, जिसमें मां दुर्गा के नौ रूपों की विधिवत पूजा की जाती है। चैत्र अमावस्या पर पितरों के लिए तर्पण और दान का अत्यंत महत्व माना जाता है। इस पावन तिथि की शुरुआत 18 मार्च को सुबह 08:25 बजे होगी और समाप्ति 19 मार्च को सुबह 06:52 बजे होगी। यह दिन शुभ कार्यों, पूजा-अर्चना और नए अध्याय की शुरुआत के लिए अत्यंत मंगलकारी है।

गणगौर व्रत

21 मार्च 2026, शनिवार को गणगौर का पावन पर्व मनाया जाएगा। यह पर्व चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को आता है और मुख्यतः सौभाग्य, दांपत्य सुख व खुशहाल गृहस्थ जीवन के लिए मनाया जाता है। इस दिन अविवाहित कन्याएँ उचित वर की प्राप्ति और विवाहित महिलाएँ अपने पति की लंबी आयु व समृद्धि की कामना करती हैं। माता गौरी और भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर महिलाएँ सौभाग्य के गीत गाती हैं और शोभायात्राएँ निकाली जाती हैं। तृतीया तिथि का प्रारंभ 21 मार्च को प्रातः 02:30 बजे होगा और समापन उसी दिन रात्रि 11:56 बजे होगा। यह पर्व प्रेम, सौहार्द और वैवाहिक सुख का प्रतीक माना जाता है।

स्कंद षष्ठी

24 मार्च 2026, मंगलवार को स्कंद षष्ठी का पावन पर्व मनाया जाएगा। यह पर्व चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की पूजा-अर्चना करने से साहस, स्वास्थ्य और विजय की प्राप्ति होती है। भक्त उपवास रखकर भगवान स्कंद की स्तुति करते हैं और परिवार की रक्षा व जीवन में सभी बाधाओं के नाश की कामना करते हैं। पंचमी तिथि का आरंभ 23 मार्च को शाम 06:38 बजे होगा और इसका समापन 24 मार्च को शाम 04:07 बजे होगा। श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

राम नवमी

26–27 मार्च 2026, गुरुवार–शुक्रवार को राम नवमी का पावन उत्सव मनाया जाएगा। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव पूरे उत्साह और भक्ति के साथ मनाया जाता है। भक्तजन व्रत रखते हैं, रामचरितमानस का पाठ करते हैं और श्रीराम, माता सीता तथा लक्ष्मण जी की पूजा-अर्चना करते हैं। नवमी तिथि का प्रारंभ 26 मार्च को दोपहर 11:48 बजे होगा और समापन 27 मार्च को सुबह 10:06 बजे होगा। श्रीराम जन्मोत्सव धर्म, सत्य और आदर्श जीवन शैली को अपनाने का संदेश देता है और भक्तों के जीवन में शुभ फल तथा आनंद की वृद्धि करता है।

कामदा एकादशी

29 मार्च 2026, रविवार को कामदा एकादशी का व्रत रखा जाएगा। चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को आने वाली यह एकादशी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए अत्यंत फलदायी मानी जाती है। शास्त्रों में वर्णित है कि इस दिन विधिपूर्वक व्रत और भगवान विष्णु के नाम का कीर्तन करने से सभी दुखों का नाश होता है तथा जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है। एकादशी तिथि का आरंभ 28 मार्च को सुबह 08:45 बजे होगा और समाप्ति 29 मार्च को सुबह 07:46 बजे होगी। श्रद्धा के साथ इस व्रत का पालन करने से भक्तों को शुभ फल की प्राप्ति होती है।

प्रदोष व्रत

30 मार्च 2026, सोमवार को प्रदोष व्रत रखा जाएगा। यह व्रत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को आता है और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन संध्या के समय शिव-पूजन करने से समस्त कष्टों का निवारण होता है, रोग-शोक दूर होते हैं और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। त्रयोदशी तिथि का आरंभ 29 मार्च को सुबह 07:46 बजे होगा और तिथि का समापन 30 मार्च को सुबह 07:09 बजे होगा। शिव भक्त इस दिन व्रत रखकर भक्ति और ध्यान में लीन होकर शिव जी की आराधना करते हैं।

Reconnect with your Faith

UserUserUser
Trusted by 1 Lakh Devotees
100% Secure