सितंबर 2026 त्योहार कैलेंडर: Festivals in September
सितंबर के त्योहार
| त्योहार | अंग्रेजी दिन | वार | माह | पक्ष / तिथि | तिथि आरंभ | तिथि समापन |
|---|---|---|---|---|---|---|
| कृष्ण जन्माष्टमी, कालाष्टमी | 4 सितंबर | शुक्रवार | भाद्रपद | कृष्ण पक्ष – अष्टमी | 02:25 AM, 4 सितंबर | 12:13 AM, 5 सितंबर |
| दही हांडी, शिक्षक दिवस | 5 सितंबर | शनिवार | भाद्रपद | कृष्ण पक्ष – नवमी | 12:13 AM, 5 सितंबर | 09:53 PM, 6 सितंबर |
| अजा एकादशी | 7 सितंबर | सोमवार | भाद्रपद | कृष्ण पक्ष – एकादशी | 07:29 PM, 6 सितंबर | 05:03 PM, 7 सितंबर |
| प्रदोष व्रत | 8 सितंबर | मंगलवार | भाद्रपद | कृष्ण पक्ष – त्रयोदशी | 02:42 PM, 8 सितंबर | 12:30 PM, 9 सितंबर |
| मासिक शिवरात्रि | 9 सितंबर | बुधवार | भाद्रपद | कृष्ण पक्ष – चतुर्दशी | 12:30 PM, 9 सितंबर | 10:33 AM, 10 सितंबर |
| दर्श अमावस्या, भाद्रपद अमावस्या | 10 सितंबर | गुरुवार | भाद्रपद | कृष्ण पक्ष – अमावस्या | 10:33 AM, 10 सितंबर | 08:56 AM, 11 सितंबर |
| हरतालिका तीज, गणेश चतुर्थी | 14 सितंबर | सोमवार | भाद्रपद | शुक्ल पक्ष – चतुर्थी | 07:06 AM, 14 सितंबर | 07:44 AM, 15 सितंबर |
| ऋषि पंचमी | 15 सितंबर | मंगलवार | भाद्रपद | शुक्ल पक्ष – पंचमी | 07:44 AM, 15 सितंबर | 08:59 AM, 16 सितंबर |
| बलराम जयंती, स्कंद षष्ठी | 16 सितंबर | बुधवार | भाद्रपद | शुक्ल पक्ष – षष्ठी | 08:59 AM, 16 सितंबर | 10:47 AM, 17 सितंबर |
| विश्वकर्मा पूजा, कन्या संक्रांति | 17 सितंबर | गुरुवार | भाद्रपद | शुक्ल पक्ष – संक्रांति | 10:47 AM, 17 सितंबर | 01:00 PM, 18 सितंबर |
| ललिता सप्तमी | 18 सितंबर | शुक्रवार | भाद्रपद | शुक्ल पक्ष – सप्तमी | 10:47 AM, 17 सितंबर | 01:00 PM, 18 सितंबर |
| राधा अष्टमी | 19 सितंबर | शनिवार | भाद्रपद | शुक्ल पक्ष – अष्टमी | 01:00 PM, 18 सितंबर | 03:26 PM, 19 सितंबर |
| परिवर्तनी एकादशी | 22 सितंबर | मंगलवार | भाद्रपद | शुक्ल पक्ष – एकादशी | 08:00 PM, 21 सितंबर | 09:43 PM, 22 सितंबर |
| प्रदोष व्रत | 24 सितंबर | गुरुवार | भाद्रपद | शुक्ल पक्ष – त्रयोदशी | 10:50 PM, 23 सितंबर | 11:18 PM, 24 सितंबर |
| गणेश विसर्जन, अनंत चतुर्दशी | 25 सितंबर | शुक्रवार | भाद्रपद | शुक्ल पक्ष – चतुर्दशी | 11:18 PM, 24 सितंबर | 11:06 PM, 25 सितंबर |
| पूर्णिमा श्राद्ध, भाद्रपद पूर्णिमा | 26 सितंबर | शनिवार | भाद्रपद | शुक्ल पक्ष – पूर्णिमा | 11:06 PM, 25 सितंबर | 10:18 PM, 26 सितंबर |
| पितृ पक्ष प्रारंभ, प्रतिपदा श्राद्ध | 27 सितंबर | रविवार | आश्विन | कृष्ण पक्ष – प्रतिपदा | 10:18 PM, 26 सितंबर | 08:58 PM, 27 सितंबर |
| द्वितीय श्राद्ध | 28 सितंबर | सोमवार | आश्विन | कृष्ण पक्ष – द्वितीया | 08:58 PM, 27 सितंबर | 07:13 PM, 28 सितंबर |
| तृतीया श्राद्ध, महाभरणी, विघ्नराज संकष्ठी | 29 सितंबर | मंगलवार | आश्विन | कृष्ण पक्ष – तृतीया | 07:13 PM, 28 सितंबर | 05:09 PM, 29 सितंबर |
| चतुर्थी, पंचमी | 30 सितंबर | बुधवार | आश्विन | कृष्ण पक्ष – चतुर्थी | 02:55 PM, 30 सितंबर | 12:35 PM, 1 अक्टूबर |
हिन्दू कैलेंडर सितंबर 2026 - व्रत एवं त्यौहार
कालाष्टमी — 5 अगस्त
कालाष्टमी भगवान शिव के उग्र और रक्षक स्वरूप काल भैरव की पूजा का दिन है। इस दिन साधक काल भैरव की आराधना कर जीवन के भय, नकारात्मक ऊर्जा और बाधाओं से मुक्ति की कामना करते हैं। इस वर्ष कालाष्टमी 5 अगस्त, बुधवार को मनाई जाएगी। अष्टमी तिथि 5 अगस्त रात 08:42 से शुरू होकर 6 अगस्त शाम 06:52 तक रहेगी। कुत्तों को भोजन कराना, भैरव चालीसा का पाठ करना और सरसों के तेल का दीपक जलाना विशेष फल देता है। माना जाता है कि भक्तों पर काल भैरव की कृपा बनी रहती है और आकस्मिक संकट समाप्त होते हैं।
कामिका एकादशी — 9 अगस्त
कामिका एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित पवित्र व्रत है, जो मन को पवित्रता और जीवन में सुख-समृद्धि प्रदान करता है। यह एकादशी 9 अगस्त, रविवार को मनाई जाएगी। तिथि 8 अगस्त दोपहर 01:59 बजे से लेकर 9 अगस्त सुबह 11:04 बजे तक रहेगी। इस दिन व्रत रखकर विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना, तुलसी पत्र चढ़ाना और दान का महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस व्रत से पापों का नाश होता है और मानसिक शांति प्राप्त होती है। तुलसी व पीपल की पूजा से शुभ फल कई गुना बढ़ जाता है।
दूसरा सावन सोमवार एवं प्रदोष व्रत — 10 अगस्त
इस बार सावन का दूसरा सोमवार 10 अगस्त, सोमवार को है और इसी दिन प्रदोष व्रत भी पड़ेगा। श्रावण मास में शिव की उपासना का विशेष महत्व होता है। त्रयोदशी तिथि सुबह 08:00 बजे शुरू होकर 11 अगस्त सुबह 04:54 बजे तक रहेगी। इस दिन भक्त शिवलिंग पर बेलपत्र, जल, दूध और गंगाजल चढ़ाते हैं। प्रदोषकाल में की गई पूजा से दांपत्य जीवन में सुख और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। माना जाता है कि सावन में शिव आराधना करने से भगवान भोलेनाथ तुरंत प्रसन्न होते हैं और सभी कष्ट हर लेते हैं।
कृष्ण जन्माष्टमी — 4 सितंबर
कृष्ण जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का सबसे बड़ा पर्व है। इस दिन भक्त व्रत रखते हैं, रात 12 बजे कृष्ण जन्म के समय माखन-मिश्री का भोग लगाते हैं और झूला झुलाते हैं। कथा के अनुसार श्रीकृष्ण ने इसी तिथि पर कंस के अत्याचार से धरती को मुक्ति दिलाने के लिए जन्म लिया था। इस बार जन्माष्टमी 4 सितंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। अष्टमी तिथि रात 02:25 बजे शुरू होकर 5 सितंबर रात 12:13 बजे समाप्त होगी। मंदिरों में सुंदर साज-सज्जा, रासलीला और भजन-कीर्तन होते हैं। माना जाता है कि इस दिन श्रीकृष्ण की पूजा करने से जीवन में सुख, प्रेम और समृद्धि आती है।
दही हांडी एवं शिक्षक दिवस — 5 सितंबर
दही-हांडी श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप का उत्सव है, जिसमें मटकी को ऊंचाई पर बांधकर मानव पिरामिड बनाकर फोड़ा जाता है। यह पर्व हमें टीमवर्क और साहस का संदेश देता है। वहीँ इसी दिन शिक्षक दिवस भी मनाया जाता है, जो देश के महान दार्शनिक और दूसरे राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को समर्पित है। इस बार यह उत्सव 5 सितंबर, शनिवार को है। नवमी तिथि 5 सितंबर रात 12:13 से शुरू होकर 6 सितंबर रात 09:53 तक रहेगी। यह दिन गुरु सम्मान और श्रीकृष्ण की नटखट लीला दोनों को एक साथ याद करने का अनोखा उत्सव है।
अजा एकादशी — 7 सितंबर
अजा एकादशी भगवान विष्णु की कृपा पाने और पापों से मुक्ति के लिए सबसे प्रिय एकादशियों में से एक है। इस दिन व्रत धारण कर, भजन-कीर्तन करने और विष्णु नाम स्मरण का विशेष महत्व होता है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत से पूर्व जन्म के पाप भी नष्ट हो जाते हैं और भाग्य उदय होता है। अजा एकादशी 7 सितंबर, सोमवार को पड़ रही है। एकादशी तिथि 6 सितंबर शाम 07:29 से शुरू होकर 7 सितंबर शाम 05:03 तक रहेगी। तुलसी और भगवान विष्णु की संयुक्त पूजा से घर में शांति और समृद्धि आती है।
प्रदोष व्रत — 8 सितंबर
प्रदोष व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने का सर्वश्रेष्ठ उपाय माना जाता है, खासकर यदि यह मंगलवार या शनिवार को पड़े। इस व्रत में प्रदोषकाल (सूर्यास्त से पहले) में शिव-पूजन किया जाता है। माना जाता है कि इस दिन शिव आराधना करने से शत्रु बाधा दूर होती है और स्वास्थ्य लाभ मिलता है। यह व्रत 8 सितंबर, मंगलवार को है। त्रयोदशी तिथि 8 सितंबर दोपहर 02:42 से 9 सितंबर दोपहर 12:30 तक रहेगी। भक्त शिवलिंग पर दूध, जल और बेलपत्र चढ़ाकर “ॐ नमः शिवाय” का जाप करते हैं। परिवार और विवाह संबंधी परेशानियाँ भी शांत होती हैं।
मासिक शिवरात्रि — 9 सितंबर
मासिक शिवरात्रि प्रत्येक महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है। यह दिन भगवान शिव के रौद्र और योगी स्वरूप की विशेष आराधना का अवसर होता है। इस दिन व्रत, रात्रि जागरण और शिवलिंग पर जल, बेलपत्र, दूध, दही, शहद का अभिषेक किया जाता है। श्रावण शिवरात्रि जितनी ही यह भी फलदायी मानी गई है। इस बार मासिक शिवरात्रि 9 सितंबर, बुधवार को है। तिथि 9 सितंबर दोपहर 12:30 से शुरू होकर 10 सितंबर सुबह 10:33 तक रहेगी। शिव आराधना से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, भय से मुक्ति और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
दर्श/भाद्रपद अमावस्या — 10 सितंबर
अमावस्या तिथि पितरों की शांति और मोक्ष के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। इस दिन पितरों के नाम तर्पण, दान और दीपदान करने से पारिवारिक कष्ट कम होते हैं। भाद्रपद अमावस्या को स्नान-दान का विशेष महत्व है। यह दिन नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने वाला माना जाता है। 10 सितंबर, गुरुवार को यह अमावस्या पड़ रही है। तिथि 10 सितंबर सुबह 10:33 से शुरू होकर 11 सितंबर सुबह 08:56 तक रहेगी। देवी-देवताओं की पूजा के साथ पितरों का स्मरण जीवन में सुख-समृद्धि और पारिवारिक सद्भाव लाता है।
हरतालिका तीज एवं गणेश चतुर्थी — 14 सितंबर
हरतालिका तीज विवाहित और अविवाहित महिलाओं के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। माता पार्वती का व्रत कर महिलाएँ अखंड सौभाग्य और मनचाहे वर की कामना करती हैं। वहीं इसी दिन विघ्नहर्ता गणेशजी का पृथ्वी पर आगमन उत्सव भी मनाया जाता है — गणेश चतुर्थी। दोनों पर्व 14 सितंबर, सोमवार को हैं। चतुर्थी तिथि 14 सितंबर सुबह 07:06 से 15 सितंबर सुबह 07:44 तक रहेगी। इस दिन गणेश स्थापना, मॉडकों का भोग और महिलाओं की पारंपरिक पूजा मिलकर घर में मंगल और प्रसन्नता का वातावरण बनाते हैं।
ऋषि पंचमी — 15 सितंबर
ऋषि पंचमी का पर्व हमारे देश की महान ऋषि परंपरा को समर्पित है। इस दिन सप्तऋषियों — कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और वशिष्ठ — का पूजन किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से जीवन में पवित्रता और स्वास्थ्य की वृद्धि होती है। यह पर्व 15 सितंबर, मंगलवार को है। पंचमी तिथि 15 सितंबर सुबह 07:44 से 16 सितंबर सुबह 08:59 तक रहेगी। महिलाएँ धार्मिक विधि से स्नान और पूजन कर अपने जीवन व परिवार के कल्याण के लिए प्रार्थना करती हैं।
बलराम जयंती एवं स्कंद षष्ठी — 16 सितंबर
भाद्रपद शुक्ल षष्ठी के दिन भगवान श्रीकृष्ण के ज्येष्ठ भ्राता बलराम जी का जन्मोत्सव मनाया जाता है। उन्हें हलधर, संकर्षण और शक्ति स्वरूप माना जाता है। इस दिन कृषिकार्यों की उन्नति और शक्ति की प्राप्ति के लिए पूजा की जाती है। इसी दिन भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय को समर्पित स्कंद षष्ठी भी होती है। भक्त संकटों और शत्रुओं से मुक्ति की कामना करते हैं। यह पर्व 16 सितंबर, बुधवार को है। तिथि सुबह 08:59 से 17 सितंबर 10:47 एएम तक रहेगी। पूजा से साहस, विजय और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
विश्वकर्मा पूजा एवं कन्या संक्रांति — 17 सितंबर
विश्वकर्मा पूजा निर्माण, शिल्प और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए विशेष पर्व है। भगवान विश्वकर्मा को विश्व के दिव्य शिल्पी और निर्माता माना जाता है। कारखानों, कार्यस्थलों और औजारों की पूजा कर उन्नति की कामना की जाती है। इसी दिन सूर्यदेव कन्या राशि में प्रवेश करते हैं जिसे कन्या संक्रांति कहते हैं। यह परिवर्तन स्वास्थ्य और कृषि के लिए शुभ माना जाता है। यह पर्व 17 सितंबर, गुरुवार को है। शुक्ल पक्ष की तिथि इस दिन 10:47 एएम से अगले दिन संक्रांति काल तक रहेगी। इस दिन कार्यक्षेत्र में सफलता की कामना की जाती है।
ललिता सप्तमी — 18 सितंबर
भाद्रपद शुक्ल सप्तमी को देवी ललिता त्रिपुरसुंदरी की आराधना की जाती है। माँ ललिता सौंदर्य, समृद्धि और शक्ति की अधिष्ठात्री देवी हैं। इस दिन उनका पूजन करने से परिवार में शांति और सौभाग्य बढ़ता है। सप्तमी तिथि 17 सितंबर 10:47 एएम से शुरू होकर 18 सितंबर दोपहर 01:00 बजे तक रहेगी, और पूजा 18 सितंबर, शुक्रवार को होगी। श्रद्धालु व्रत, जप और अर्चन करके देवी का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। यह दिवस नकारात्मक शक्तियों के विनाश और आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।
राधा अष्टमी — 19 सितंबर
राधाष्टमी श्री राधारानी का प्राकट्य दिवस है, जो भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है। श्रीकृष्ण की आनंद-शक्ति स्वरूपा राधा प्रेम, भक्ति और करूणा की प्रतीक मानी जाती हैं। इस दिन राधा-कृष्ण की एक साथ पूजा होती है और राधा नाम का जप विशेष फलदायी माना जाता है। अष्टमी तिथि 18 सितंबर 01:00 PM से 19 सितंबर 03:26 PM तक रहेगी। यह पर्व 19 सितंबर, शनिवार को मनाया जाएगा। भक्त व्रत-उपवास कर सच्चे प्रेम, सौभाग्य और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं।
परिवर्तनी एकादशी — 22 सितंबर
परिवर्तनी या पद्मा एकादशी भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी होती है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में शेषनाग की शैय्या पर करवट बदलते हैं, इसलिए इसे परिवर्तनी एकादशी कहा जाता है। यह एकादशी व्रत करने से पापों का नाश होता है और स्वास्थ्य, धन तथा सौभाग्य प्राप्त होता है। तिथि 21 सितंबर रात 08:00 बजे से शुरू होकर 22 सितंबर रात 09:43 बजे तक रहेगी। इस दिन हरि नाम स्मरण, कथा और दान-पुण्य का विशेष महत्व है। भक्त अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन और इच्छापूर्ति के लिए व्रत करते हैं।
प्रदोष व्रत — 24 सितंबर
प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है और भाद्रपद शुक्ल त्रयोदशी को पड़ता है। इस दिन संध्या काल में शिवजी की पूजा-अर्चना करने से जीवन में शांति, प्रसन्नता और सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है। यह व्रत 23 सितंबर रात 10:50 बजे से लेकर 24 सितंबर रात 11:18 बजे तक मान्य रहेगा। श्रद्धालु व्रत रखकर शिवलिंग पर जल, दूध और बिल्वपत्र चढ़ाते हैं। इस व्रत से दांपत्य जीवन में मधुरता आती है और मन की इच्छाएँ पूर्ण होती हैं।
गणेश विसर्जन एवं अनंत चतुर्दशी — 25 सितंबर
भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी को भगवान गणेश की विदाई का दिवस होता है जिसे गणेश विसर्जन कहते हैं। गणपति बप्पा को विदाई देते हुए “पुढ़च्या वर्षी लवकर या” का संकल्प लिया जाता है। इसी दिन अनंत चतुर्दशी भी मनाई जाती है जिसमें भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा होती है। यह पर्व 24 सितंबर रात 11:18 बजे से शुरू होकर 25 सितंबर रात 11:06 बजे तक रहेगा। भक्त अनंत सूत्र धारण करते हैं जिससे घर परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
पूर्णिमा श्राद्ध — 26 सितंबर
भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा को पूर्णिमा श्राद्ध किया जाता है। यह दिन पितरों की तृप्ति और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। श्राद्ध से पूर्वज प्रसन्न होकर परिवार पर कृपा करते हैं और कष्टों को दूर करते हैं। तिथि 25 सितंबर रात 11:06 बजे से 26 सितंबर रात 10:18 बजे तक रहेगी। पितरों को तर्पण, पिंडदान और भोजन दान किया जाता है। यह दिन भाद्रपद पूर्णिमा के रूप में भी मनाया जाता है और इस दिन पूजा-पाठ तथा दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
पितृ पक्ष प्रारंभ — 27 सितंबर
पितृ पक्ष या श्राद्ध पक्ष आश्विन कृष्ण प्रतिपदा से प्रारंभ होता है। यह समय पूर्वजों को याद कर उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और श्राद्ध करने का होता है। तिथि 26 सितंबर रात 10:18 बजे से 27 सितंबर रात 08:58 बजे तक रहेगी। इस दिन प्रतिपदा श्राद्ध किया जाएगा। मान्यता है कि इन दिनों पितृ लोक के द्वार खुलते हैं और पितर अपने वंशजों के श्राद्ध को स्वीकार करते हैं। तर्पण और पितरों को भोजन अर्पित करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
द्वितीय श्राद्ध — 28 सितंबर
पितृ पक्ष की द्वितीया तिथि को द्वितीय श्राद्ध किया जाता है। इस दिन विशेष रूप से उन पितरों का श्राद्ध किया जाता है जिनका निधन इस तिथि को हुआ हो। तिथि 27 सितंबर रात 08:58 बजे से शुरू होकर 28 सितंबर शाम 07:13 बजे तक रहेगी। श्रद्धालु पितरों के नाम से जल, तर्पण, खाना और वस्त्र दान करते हैं। माना जाता है कि इस दिन श्राद्ध करने से पूर्वज प्रसन्न होकर अपने परिवार को स्वस्थ, धनवान और समृद्ध बनाते हैं तथा वंश की बाधाएँ समाप्त होती हैं।
तृतीया श्राद्ध, महाभरणी एवं विघ्नराज संकष्टी — 29 सितंबर
29 सितंबर आश्विन कृष्ण तृतीया का दिन कई धार्मिक मान्यताओं वाला होगा। महाभरणी देवी पूजा का विशेष दिन है। वहीं विघ्नराज संकष्टी में गणेशजी की आराधना कर विघ्नों को दूर करने का संकल्प लिया जाता है। इस दिन तृतीया श्राद्ध भी किया जाएगा, जिसमें पितरों को तर्पण दिया जाता है। तिथि 28 सितंबर शाम 07:13 बजे से 29 सितंबर शाम 05:09 बजे तक रहेगी। यह दिन आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण फायदे लाता है — जैसे बाधाओं से मुक्ति और पूर्वजों का आशीर्वाद।
चतुर्थी/पंचमी श्राद्ध — 30 सितंबर
यह दिन आश्विन कृष्ण चतुर्थी और पंचमी दोनों का संयुक्त पुण्यफल देने वाला माना गया है। तिथि 30 सितंबर दोपहर 02:55 बजे से शुरू होकर 1 अक्टूबर दोपहर 12:35 बजे तक रहेगी। इस दिन उन पितरों का श्राद्ध किया जाता है जिनकी तिथियाँ चतुर्थी या पंचमी को पड़ती हैं। पितरों को तर्पण, भोजन अर्पण और ब्राह्मणों को भोजन कराकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। इस दिन का श्राद्ध करने से जीवन में स्थिरता, स्वास्थ्य और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

