मई 2026 त्योहार कैलेंडर: Festivals in May
मई के त्योहार
| त्योहार | अंग्रेजी दिन | वार | माह | पक्ष / तिथि | तिथि आरंभ | तिथि समापन |
|---|---|---|---|---|---|---|
| बुध पूर्णिमा, वैशाख पूर्णिमा | 1 मई | शुक्रवार | वैशाख | शुक्ल पक्ष – पूर्णिमा | 09:12 PM, 31 अप्रैल | 10:52 PM, 1 मई |
| एकदंत संकष्टी चतुर्थी | 5 मई | मंगलवार | ज्येष्ठ | कृष्ण पक्ष – चतुर्थी | 05:24 AM, 5 मई | 07:51 AM, 6 मई |
| कालाष्टमी | 9 मई | शनिवार | ज्येष्ठ | कृष्ण पक्ष – अष्टमी | 02:02 PM, 9 मई | 03:06 PM, 10 मई |
| अपरा एकादशी | 13 मई | बुधवार | ज्येष्ठ | कृष्ण पक्ष – एकादशी | 02:52 PM, 12 मई | 01:29 PM, 13 मई |
| प्रदोष व्रत | 14 मई | गुरुवार | ज्येष्ठ | कृष्ण पक्ष – त्रयोदशी | 11:20 AM, 14 मई | 08:31 AM, 14 मई |
| वृषभ संक्रांति | 15 मई | शुक्रवार | ज्येष्ठ | कृष्ण पक्ष – चतुर्दशी | 08:31 AM, 15 मई | 05:11 AM, 16 मई |
| वट सावित्री, शनि अमावस्या, ज्येष्ठ अमावस्या | 16 मई | शनिवार | ज्येष्ठ | कृष्ण पक्ष – अमावस्या | 05:11 AM, 16 मई | 01:30 AM, 17 मई |
| गंगा दशहरा | 25 मई | सोमवार | ज्येष्ठ | शुक्ल पक्ष – दशमी | 04:30 AM, 25 मई | 05:10 AM, 26 मई |
| पद्मिनी एकादशी | 27 मई | बुधवार | ज्येष्ठ | शुक्ल पक्ष – एकादशी | 05:10 AM, 26 मई | 06:21 AM, 27 मई |
| प्रदोष व्रत | 28 मई | गुरुवार | ज्येष्ठ | शुक्ल पक्ष – त्रयोदशी | 06:21 AM, 27 मई | 07:56 AM, 28 मई |
| ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा | 31 मई | रविवार | ज्येष्ठ | शुक्ल पक्ष – पूर्णिमा | 11:57 AM, 30 मई | 02:14 PM, 31 मई |
हिन्दू कैलेंडर मई 2026 - व्रत एवं त्यौहार
वैशाख पूर्णिमा
1 मई 2026, शुक्रवार को बुध पूर्णिमा, जिसे वैशाख पूर्णिमा भी कहा जाता है, का पावन पर्व मनाया जाएगा। यह पर्व वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को पड़ता है और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन गंगा स्नान, दान-पुण्य और भगवान विष्णु तथा देवी-देवताओं की पूजा का विशेष महत्व होता है। पूर्णिमा तिथि का आरंभ 31 अप्रैल को रात 09:12 बजे से होकर समाप्ति 1 मई को रात 10:52 बजे तक रहेगा। इस दिन किए गए व्रत, पूजा और दान से मन और आत्मा की शुद्धि होती है तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
संकष्टी चतुर्थी
5 मई 2026, मंगलवार को एकदंत संकष्टी चतुर्थी का पावन व्रत मनाया जाएगा। यह व्रत ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को आता है और भगवान गणेश के विशेष एकदंत रूप की उपासना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन व्रती संध्या के समय गणेश जी की पूजा करते हैं, विशेष रूप से चंद्र दर्शन के साथ उनका ध्यान और मंत्र जाप करते हैं। चतुर्थी तिथि का प्रारंभ 5 मई को सुबह 05:24 बजे होगा और समापन 6 मई को सुबह 07:51 बजे होगा। श्रद्धा और भक्ति के साथ व्रत करने से सभी बाधाएँ दूर होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि व मंगल प्राप्त होता है।
कालाष्टमी
9 मई 2026, शनिवार को कालाष्टमी का पावन पर्व मनाया जाएगा। यह पर्व ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आता है और भगवान भैरव की विशेष आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। भक्तजन इस दिन व्रत रखते हैं और भगवान भैरव की पूजा-अर्चना करके सुरक्षा, समृद्धि और बाधाओं से मुक्ति की कामना करते हैं। अष्टमी तिथि का आरंभ 9 मई को दोपहर 02:02 बजे होगा और समापन 10 मई को दोपहर 03:06 बजे होगा। श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा करने से भगवान भैरव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
अपरा एकादशी
13 मई 2026, बुधवार को अपरा एकादशी का व्रत रखा जाएगा। यह व्रत ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को पड़ता है और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्ति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन व्रत और उपवास करने से सभी पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख, समृद्धि तथा मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। एकादशी तिथि का आरंभ 12 मई को दोपहर 02:52 बजे होगा और समाप्ति 13 मई को दोपहर 01:29 बजे होगी। भक्तजन विधिपूर्वक व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा और भजन-कीर्तन करते हैं, जिससे उन्हें विशेष पुण्य और आशीर्वाद प्राप्त होता है।
प्रदोष व्रत
14 मई 2026, गुरुवार को प्रदोष व्रत रखा जाएगा। यह व्रत ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को आता है और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्ति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन संध्या समय शिवजी की पूजा-अर्चना करने से जीवन में सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और मानसिक शांति प्राप्त होती है तथा सभी कष्ट दूर होते हैं। त्रयोदशी तिथि का आरंभ 14 मई को सुबह 11:20 बजे होगा और समाप्ति 14 मई को सुबह 08:31 बजे होगी। श्रद्धा और भक्ति के साथ व्रत रखने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है और भक्तों के जीवन में मंगल और कल्याण की वृद्धि होती है।
वृषभ संक्रांति
15 मई 2026, शुक्रवार को वृषभ संक्रांति का पावन दिन है। यह दिन ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को पड़ता है और सूर्य के वृषभ राशि में प्रवेश का प्रतीक है। इस अवसर पर नई शुरुआत, कृषि संबंधी कार्य और आय में वृद्धि की कामना की जाती है। संक्रांति तिथि का आरंभ 15 मई को सुबह 08:31 बजे होगा और समापन 16 मई को सुबह 05:11 बजे होगा। इस दिन दान-पुण्य, व्रत और धार्मिक अनुष्ठान करने से जीवन में सुख-समृद्धि, सौभाग्य और शांति प्राप्त होती है।
वट सावित्री, शनि अमावस्या और ज्येष्ठ अमावस्या
16 मई 2026, शनिवार को वट सावित्री, शनि अमावस्या और ज्येष्ठ अमावस्या का पावन संयोग बन रहा है। यह दिन ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को आता है। वट सावित्री पर महिलाएँ अपने पति की लंबी आयु और परिवार की खुशहाली के लिए वटवृक्ष के नीचे उपवास और पूजा करती हैं। शनि अमावस्या पर शनि देव की आराधना और दोष निवारण के उपाय किए जाते हैं। इस अवसर पर अमावस्या तिथि का आरंभ 16 मई को सुबह 05:11 बजे होगा और समाप्ति 17 मई को सुबह 01:30 बजे होगी। इस दिन दान, पूजा और व्रत करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
गंगा दशहरा
25 मई 2026, सोमवार को गंगा दशहरा का पावन पर्व मनाया जाएगा। यह पर्व ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को पड़ता है और माँ गंगा के अवतरण का प्रतीक माना जाता है। गंगा दशहरा पर लोग गंगा स्नान, दान-पुण्य और विशेष पूजा-अर्चना करते हैं, जिससे पापों का नाश होता है और जीवन में शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि आती है। दशमी तिथि का आरंभ 25 मई को सुबह 04:30 बजे होगा और समाप्ति 26 मई को सुबह 05:10 बजे होगी। इस दिन भक्तगण नदी तट पर या घर पर पूजा-अर्चना करके माँ गंगा की कृपा प्राप्त करते हैं।
पद्मिनी एकादशी
27 मई 2026, बुधवार को पद्मिनी एकादशी का पावन व्रत रखा जाएगा। यह व्रत ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को आता है और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन उपवास और पूजा करने से पापों का नाश होता है और जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि आती है। एकादशी तिथि का आरंभ 26 मई को सुबह 05:10 बजे होगा और समापन 27 मई को सुबह 06:21 बजे होगा। भक्तजन इस दिन भगवान विष्णु की स्तुति, भजन-कीर्तन और दान-पुण्य करके विशेष पुण्य और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
प्रदोष व्रत
28 मई 2026, गुरुवार को प्रदोष व्रत मनाया जाएगा। यह व्रत ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को आता है और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन संध्या के समय शिवजी की विधिपूर्वक पूजा करने से जीवन में सुख-शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि प्राप्त होती है तथा सभी बाधाएँ दूर होती हैं। त्रयोदशी तिथि का आरंभ 27 मई को सुबह 06:21 बजे होगा और समाप्ति 28 मई को सुबह 07:56 बजे होगी। श्रद्धा और भक्ति के साथ व्रत-पूजन करने से भगवान शिव की कृपा और आशीर्वाद मिलता है।
ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा
31 मई 2026, रविवार को ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा का पावन दिन मनाया जाएगा। यह पर्व ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को पड़ता है और इसे विशेष रूप से पवित्र और शुभ माना जाता है। इस दिन गंगा स्नान, दान-पुण्य और भगवान विष्णु व देवी-देवताओं की पूजा का विशेष महत्व होता है। पूर्णिमा तिथि का आरंभ 20 मई को सुबह 11:57 बजे से हुआ और समापन 31 मई को दोपहर 02:14 बजे होगा। इस पावन अवसर पर किए गए व्रत, दान और पूजा से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

